विदेशी कंपनियों पर टैक्स के नियमImage Credit source: AI
केंद्र सरकार Budget 2026 में विदेशी कंपनियों से जुड़े टैक्स नियमों को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला ले सकती है. खासकर उन कंपनियों के लिए, जो भारत में बिना बड़ा दफ्तर या फैक्ट्री लगाए डिजिटल या टेक्नोलॉजी के ज़रिए अच्छी कमाई कर रही हैं. सरकार अब ऐसे नियम लाने पर विचार कर रही है, जिससे टैक्स सिस्टम ज्यादा साफ, आसान और विवाद-मुक्त बनाया जा सके.
अभी तक भारत में किसी विदेशी कंपनी पर टैक्स तभी साफ-साफ लगता है, जब उसका यहां स्थायी प्रतिष्ठान माना जाए. लेकिन डिजिटल कंपनियों के दौर में यह तय करना मुश्किल हो गया है कि कंपनी की असली मौजूदगी भारत में है या नहीं. इसी उलझन की वजह से कई कंपनियों को टैक्स नोटिस मिले और लंबे केस चल रहे हैं. अब सरकार पुराने नियमों की जगह फॉर्मूला-आधारित टैक्स सिस्टम लाने पर विचार कर रही है, जिसमें कंपनी के मुनाफे का एक तय हिस्सा भारत से जुड़ी कमाई के आधार पर टैक्स के दायरे में आएगा.
क्यों जरूरी हो गया है यह बदलाव?
दुनिया भर में OECD के तहत एक ग्लोबल टैक्स व्यवस्था पर बातचीत चल रही है, लेकिन उसमें लगातार देरी हो रही है. ऐसे में भारत सरकार यह नहीं चाहती कि देश का टैक्स अधिकार कमजोर पड़े. इसी कारण घरेलू स्तर पर एक ऐसा सिस्टम लाने की तैयारी है, जिससे विदेशी और मल्टीनेशनल कंपनियों को टैक्स में निश्चितता मिले और सरकार को सही राजस्व.
छोटी कमाई पर राहत, बड़ी कमाई पर तय नियम
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर किसी विदेशी कंपनी को भारत से सीधे मिलने वाला भुगतान 10 लाख रुपये से कम है, तो उस पर अतिरिक्त टैक्स नहीं लगेगा. लेकिन अगर यह सीमा पार होती है, तो एक तय फॉर्मूले से यह तय किया जाएगा कि भारत में कितना मुनाफा टैक्स के दायरे में आएगा. इससे छोटी कंपनियों और स्टार्टअप्स को राहत मिलेगी, जबकि बड़ी डिजिटल और टेक कंपनियों पर समान नियम लागू होंगे. इसके अलावा सरकार इस बात का भी ध्यान रख रही है कि कंपनियों पर दोहरी टैक्स मार न पड़े. अगर किसी भारतीय सहयोगी कंपनी ने पहले ही टैक्स दे दिया है, तो उसी मुनाफे पर विदेशी कंपनी को टैक्स क्रेडिट मिलेगा. इससे सिस्टम ज्यादा फेयर और ट्रांसपेरेंट बनेगा.
GCCs और डिजिटल कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?
भारत में मौजूद कई GCCs और डेटा सेंटर्स को अब तक टैक्स को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ा है. नए नियम लागू होने से उन्हें साफ पता होगा कि कितना टैक्स देना है और क्यों. इससे निवेश का माहौल बेहतर होगा और मुकदमेबाजी कम हो सकती है. अगर यह बदलाव Budget 2026 में लागू होते हैं, तो भारत एक डिजिटल-फ्रेंडली लेकिन टैक्स-स्मार्ट देश के रूप में सामने आ सकता है. संभव है कि टैक्स की दरें सीधे कम न हों, लेकिन नियम साफ होने से कंपनियां ज्यादा निवेश करेंगी, जिससे रोजगार और इकोनॉमी दोनों को फायदा होगा.
यह भी पढ़ें- BUDGET 2026-27: किसानों और ग्रामीणों की होगी मौज, बजट में सरकार कर रही है उनके लिए बड़ी तैयारी

