रूस के सहयोग से डीयू में बनेगी स्पेस मिरर लैबImage Credit source: Getty Images
Putins Visit To India: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं. पुतिन का भारत कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पुतिन और पीएम मोदी की मुलाकात के बाददोनों देश के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते पर एक साथ काम करने को लेकर सहमति बनी है. इस बीच दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने भी एक महत्वपूर्ण ऐलान किया है. डीयू के कुलपति प्राेफेसर योगेश सिंह ने कहा है कि रूस की HSE यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर डीयू एक स्पेस मिरर लैब बनाएगा.
आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है? डीयू और HSE के मिलकर स्पेस मिरर लैब बनाने के मायने क्या हैं? डीयू वाइस चांसलर ने इसको लेकर क्या कहा है?
DU और HSE के बीच SOC
स्पेस मिरर लैब बनाने के लिए के लिए शुक्रवार 5 दिसंबर को दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) और नेशनल रिसर्च यूनिवर्सिटी हायर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (HSE यूनिवर्सिटी), रूस के बीच ‘स्टेटमेंट ऑफ कोऑपरेशन’ (SOU) हुआ है.
SOU पर HSE यूनिवर्सिटी के रेक्टर डॉ. निकिता अनिसिमोवा और डीयू के रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता ने वाइस चांसलर प्रो. योगेश सिंह की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए हैं. इस दौरान रूस की ओर से एचएसई यूनिवर्सिटी के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. मनोज शर्मा, अनास्तासिया सर्गेवा उपस्थित रही, जबकि डीयू की ओर से डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. बलराम पाणी, एसओएल की डायरेक्टर प्रो. पायल मागो, चेयरमैन इंटरनेशनल रिलेशन प्रो. नीरा अग्निमित्रा समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे.
डीयू में बनेगी लैब, वीसी ने क्या कहा?
स्पेस मिरर लैब बनाने को लेकर HSE के साथ SOU को लेकर डीयू के वाइस चांसलर प्रोफेसर योगेश सिंह ने कहा कि दो मित्र देशों के दो बड़े संस्थान संयुक्त रूप से रिसर्च में आगे आए हैं, ये यह बहुत ही खुशी का विषय है. उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सहयोग HSE यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर डीयू की फैकल्टी ऑफ टेक्नोलॉजी में एक स्पेस मिरर लैब बनाने के लिए है.
स्पेस मिरर लैब क्यों खास?
डीयू के वाइस चांसलर प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि साइंटिफिक स्पेस मिरर लैबोरेटरी बनाना बहुत ही दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी योजना है. दोनों संस्थानएकेडमिक रिसर्च के मकसद से स्पेस स्पेक्ट्रम में डेटा स्टोरेज, प्रोसेसिंग और ट्रांसमिशन पर काम करेंगे. उन्होंने कहा किदोनों यूनिवर्सिटी मिरर लैब के जरिए मिलकर ऐसे जॉइंट रिसर्च और एजुकेशनल प्रोजेक्ट पर काम करेंगी, जो भारत और रूस के लिए काम के होंगे. वाइस चांलसर ने कहा कि इसके अलावा भी कई और शैक्षणिक परियोजनाएं भी पाइपलाइन में हैं. उन्होंने कहा कि इन साझा अकेडमिक और रिसर्च प्राेग्राम से दोनों यूनिवर्सिटी और टीचरों को फायदा होगा.
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