न्यूयॉर्क में हर चार साल में मेयर चुना जाता है.
अमेरिका में न्यूयॉर्क शहर के मेयर का चुनाव इस वक्त जबरदस्त चर्चा में है. न्यूयॉर्क के मेयर का काम अमेरिका में राष्ट्रपति के बाद दूसरा सबसे कठिन काम माना जाता है. आइए जान लेते हैं कि न्यूयॉर्क में मेयर कैसे चुनाव जाता है? उसके पास कितनी शक्तियां और जिम्मेदारियां होती हैं और वह भारतीय मेयर से कितना अलग होता है?
न्यूयॉर्क में हर चार साल में मेयर चुना जाता है. मेयर के चुनाव की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है. यह चुनाव अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव के अगले साल होता है. इसके लिए पहले पार्टी के स्तर पर प्राथमिक चुनाव होते हैं. इसमें अव्वल रहने वाले उम्मीदवार चुनाव में हिस्सा लेते हैं. साल 2021 से न्यूयॉर्क में मेयर का चुनाव रैंक च्वाइस वोटिंग के जरिए होता है.
रैंंकिंग सिस्टम
इस प्रक्रिया में मतदाता अपनी-अपनी पसंद के अनुसार अधिकतम पांच उम्मीदवारों को एक से पांच तक की रैंक देते हैं. मेयर बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को पहली रैंक या पसंद के 50 फीसदी से अधिक वोट मिलने चाहिए. जब तक ऐसा नहीं होता है, तब तक सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों को हटाकर दूसरी वरीयता को उसके वोट भी ट्रांसफर कर दिए जाते हैं. इसके बाद भी अगर कोई उम्मीदवार बहुमत हासिल नहीं करता है तो इन उम्मीदवारों के बीच आमतौर पर नवंबर में आम चुनाव कराए जाते हैं. इसमें जीतने वाला उम्मीदवार न्यूयॉर्क का मेयर बनता है, जो अगले साल की एक जनवरी को अपना कार्यभार ग्रहण करता है.
न्यूयॉर्क का मेयर 1 जनवरी को अपना कार्यभार ग्रहण करता है.
कौन लड़ सकता है मेयर का चुनाव
न्यूयॉर्क के मेयर पद का चुनाव लड़ने के लिए किसी को भी अमेरिकी नागरिक होना चाहिए. चुनाव के दिन उम्मीदवार की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए. यही नहीं, चुनाव से कम से कम एक साल पहले से उसे न्यूयॉर्क शहर का निवासी होना चाहिए. इसके अलावा मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि, सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रियता, चुनाव के लिए धन जुटाने की क्षमता के आधार पर पार्टियां अपने उम्मीदवार का चयन करती हैं.
बेहद शक्तिशाली और जिम्मेदार पद
अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क का मेयर बेहद शक्तिशाली होता है और उसके कंधों पर पूरे शहर की शासन व्यवस्था और सुरक्षा का जिम्मा होता है. उसके पास सारी कार्यकारी शक्तियां होती हैं. न्यूयॉर्क के विशाल प्रशासन का प्रभारी मेयर ही होता है. वह नीतियों में बदलाव या संशोधन करता है. अपने शहर के लोगों को किसी भी आपात स्थिति से निकालने के लिए जिम्मेदार होता है.
शहर की आर्थिक तरक्की के उपाय, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और जन सुरक्षा जैसे मुद्दों से निपटना मेयर के ही जिम्मे होता है. यहां तक कहा जाता है कि न्यूयॉर्क का मेयर किसी वैश्विक नेता से कम नहीं होता है. न्यूयॉर्क के लोअर मैनहट्टन में स्थित सिटी हॉल से शहर की विधायी सरकार का संचालन करते हैं. वही न्यूयॉर्क के प्रमुख अफसरों की नियुक्ति और उन्हें हटाने का दायित्व भी निभाते हैं.
भारतीय मूल के जोहरान क्वामे ममदानी को न्यूयॉर्क मेयर की दौड़ में आगे बजाया जा रहा है. फोटो: AP/PTI
सुरक्षा का जिम्मा भी मेयर के कंधों पर
भारत में मेयर के पास शहर के विकास का जिम्मा होता है. यहां नगर निगम के अधीन आने वाली सड़कों, पार्कों, नालों-नालियों, स्ट्रीट लाइट आदि के प्रबंधन का जिम्मा नगर निगम प्रशासन के जरिए मेयर करते हैं. इसके लिए बजट का प्रावधान नगर निगम अपनी तमाम आय के जरिए करता है. कुछ शिक्षण संस्थान भी नगर निगम संचालित करता है. दूसरी ओर, न्यूयॉर्क का मेयर पूरे शहर का सर्वेसर्वा होता है. वही शहर के लिए नीतियां बनाता है. शिक्षा ही नहीं, शहर की सुरक्षा का जिम्मा भी न्यूयॉर्क के मेयर के कंधों पर ही होता है. भारत में शहर की सुरक्षा का जिम्मा स्थानीय पुलिस के पास होता है, जो राज्य सरकार के अधीन होती है.
भारतीय मूल के जोहरान रेस में आगे
भारतीय मूल के जोहरान क्वामे ममदानी इस बार न्यूयॉर्क के मेयर के चुनाव की दौड़ में आगे बताए जा रहे हैं. उनका जन्म साल 1991 में युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ. उनके भारतीय मूल के पिता ने घाना के पहले प्रधानमंत्री क्वामे एन्क्रूमाह के नाम पर उनका मध्य का नाम क्वामे रखा है. कंपाला से पांच साल की उम्र में ममदानी दक्षिण अफ्रीका चले गए, जहां उनके पिता प्रोफेसर थे. फिर सात साल की उम्र में न्यूयॉर्क आ गए. वहां साल 2020 में राजनीति में उतरे, जब न्यूयॉर्क विधानसभा के लिए चुने गए थे.
इसके बाद न्यूयॉर्क के मेयर पद के चुनाव में एंड्रयू कुओमो को हराकर उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवारी हासिल की और अब इस रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं. भारतीय मूल के लोगों का दिल जीतने के लिए वह हिन्दी में प्रचार करते दिख जाते हैं. अगर वह चुनाव जीतते हैं तो न्यूयॉर्क के पहले मुसलमान और पहले दक्षिण एशियाई मेयर होंगे.
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