स्टॉक मार्केट वैल्युएशन और ग्लोबल इकोनॉमी के मामले में ताइवान ने भारत को पीछे छोड़ दिया है। ताइवान ने शानदार तकनीकी उछाल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक मांग के दम पर पहली बार यह प्राप्त कर लिया है। और वह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है 4.95 ट्रिलियन डॉलर के साथ जबकि भारत 4.92 ट्रिलियन डॉलर के साथ छठे स्थान पर खिसक गया है।
ताइवान की जीडीपी (GDP) भारत की जीडीपी का केवल 23% है, फिर भी मजबूत तकनीकी शेयरों के दम पर उसका कुल बाजार मूल्य भारत से आगे निकल गया है। इसका मुख्य कारण AI चिप्स की भारी मांग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्रांति में ताइवान दुनिया का केंद्र बन गया है। एनवीडिया (Nvidia), ऐप्पल (Apple) और एएमडी (AMD) जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के लिए चिप्स का निर्माण ताइवान में ही होता है।
दूसरी ओर ताइवान की सबसे बड़ी कंपनी ‘TSMC’ (Taiwan Semiconductor Manufacturing Company) के शेयरों में हाल ही में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है, जिसने पूरे ताइवान के बाजार सूचकांक को ऊपर खींच लिया है। वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर्स की बढ़ती मांग के कारण निवेशकों का भरोसा ताइवान के तकनीकी शेयरों पर बहुत मजबूत हुआ है। ताइवान के वित्तीय नियामक (Financial Supervisory Commission) ने घरेलू फंड्स के लिए निवेश की सीमा में बदलाव किया है जिनके अनुसार, ताइवानी शेयरों (Taiwanese equities) पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करने वाले फंड अब अपनी शुद्ध संपत्ति (net assets) का 25% तक किसी एकल सूचीबद्ध कंपनी (single listed company) में निवेश कर सकते हैं। हालाँकि, इसकी शर्त यह है कि उस कंपनी का ताइवान स्टॉक एक्सचेंज के भारांक में 10% से अधिक का योगदान होना चाहिए। पहले यह सीमा केवल 10% तक ही सीमित थी। फिलहाल, इस नए मानदंड और योग्यता पर खरा उतरने वाली TSMC एकमात्र कंपनी है। TSMC का ताइवान के बेंचमार्क सूचकांक (benchmark index) में 40% से भी अधिक का हिस्सा है।
भारतीय बाजार में गिरावट का कारण भारतीय बाजारों में कंपनियों की कमाई (आय वृद्धि) उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अन्य वैश्विक बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का मूल्यांकन अधिक था, जिस कारण निवेशकों ने अपना पैसा निकालना शुरू किया। और विदेशी निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में भारत की हिस्सेदारी को कम किया है। वैश्विक निवेशकों द्वारा इस वर्ष अब तक लगभग $24 बिलियन मूल्य के भारतीय शेयर बेचे गए हैं। इसका मुख्य कारण ताइवान और दक्षिण कोरिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर तकनीक की ओर पूंजी का तेजी से स्थानांतरण होना है।
घरेलू बाजारों में तुलनात्मक रूप से धीमी बढ़त और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली के कारण भारतीय बाजार फिसलकर छठे स्थान पर आ गया है। भारत का बेंचमार्क सूचकांक लगभग ,8.5% गिर गया है। इसके परिणामस्वरूप, 2015 के बाद से पहली बार, भारतीय शेयर बाजार में लगातार एक दशक की वृद्धि के बाद इस वर्ष सालाना गिरावट देखने की संभावना है। इसके साथ ही, ग्लोबल बेंचमार्क (MSCI Emerging Markets Index) में भारत का भार (weight) गिरकर लगभग 12% हो गया है, जो कभी 19% से अधिक के शिखर पर था।
रिपोर्ट – सबा परबीन
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