जेईई मेन्स 2026 की परीक्षा का आयोजन दो सेशन में किया जाएगा.
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JEE Mains 2026: 12वीं बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए जेईई मेन्स की परीक्षा बहुत महत्वपूर्ण होती है. जेईई मेन्स 2026 का आयोजन दो सेशन में किया जाएगा. पहला सेशन 21 जनवरी 2026 से 30 जनवरी तक किया जाएगा. वहीं दूसरा सेशन अप्रैल में होगा. परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से किया जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि किस आईआईटी में केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई सबसे पहले शुरू हुई थी और वहां एडमिशन कैसे मिलता है.
केमिकल इंजीनियरिंग भी बीटेक की प्रमुख ब्रांचों में से एक है. इसकी पढ़ाई करने के बाद नौकरी की टेंशन खत्म हो जाती है. सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टरों में इस ब्रांच के प्रोफेशनल्स की डिमांड है. देश भर के विभिन्न इंजीनियरिंग काॅलेजों में इसकी पढ़ाई होती हैं. देश भर में कुल 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) हैं , जिनमें यह कोर्स संचालित किया जाता है.
किस IIT में सबसे पहले शुरू हुई थी केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई?
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आईआईटी खड़गपुर में अन्य भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों से पहले केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू हुई थी. इसकी स्थापना 1951 में हुई थी और उसके शुरूआती 10 विभागों में केमिकल इंजीनियरिंग की शामिल था. काॅलेज में केमिकल इंजीनियरिंग की कुल करीब 115 सीटे हैं, जिन पर दाखिला जेईई एडवास्ड स्कोर और रैंक के जरिए जोसा काउंसलिंग के माध्यम से होता है.
कितनी हैं NIRF रैंकिंग?
एनआईआरएफ रैंकिंग 2025 में IIT खड़गपुर को समग्र श्रेणी में 6वां, इंजीनियरिंग कैटेगरी में में 5वां और रिसर्च में 5वां स्थान मिला है. यह संस्थान पढ़ाई के साथ-साथ प्लेसमेंट के लिए भी देश भर में जाना जाता है. अधिक जानकारी के लिए छात्र काॅलेज की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं.
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर, पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में भारत सरकार द्वारा स्थापित एक सार्वजनिक प्रौद्योगिकी संस्थान, अनुसंधान विश्वविद्यालय और स्वायत्त संस्थान है. 1951 में स्थापित, यह संस्थान पहला आईआईटी है और इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है. 2019 में इसे भारत सरकार द्वारा इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा दिया गया.
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