अपनी मां के साथ लेफ्टिनेंट हरदीप गिलImage Credit source: X
Lt. Hardeep Gill Success Story: देहरादून में बीते शनिवार को हुई इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) की परेड में शामिल पास आउट होने वाले कैंडिडेट्स में से कई ने सफलता की एक नई मिशाल पेश की है. उन्हीं में से एक हैं हरियाणा के जींद जिले के रहने वाले हरदीप गिल. वह सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं. यहां तक का उसका सफर बहुत ही संघर्षपूर्ण और कठिनाइयों से भरा रहा. जब वह दो साल के थे, तो उनके पिता का निधन हो गया था. ऐसे में उनकी मां ने वह कर दिखाया, जिसकी किसी को उम्मीद तक नहीं थी. आइए जानते हैं कि हरदीप सेना में लेफ्टिनेंट कैसे बने.
हरदीप गिल बहुत निराश हो गए थे, जब अग्निपथ स्कीम लॉन्च होने की वजह से चुने जाने के बावजूद वह इंडियन एयर फोर्स में शामिल नहीं हो पाएं. उनके बैच को ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला था. अब चार साल बाद वह इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), देहरादून से पास आउट होने के बाद सिख लाइट इन्फेंट्री में एक ऑफिसर के तौर पर कमीशन हुए हैं. उनकी नियुक्ति लेफ्टिनेंट पोस्ट पर हुई है.
मां ने खेतों में मजदूरी कर पढ़ाया, बेटे ने गर्व के ऊंचा कर दिया सिर
हरदीप गिल मूल रूप सरे हरियाणा के जींद जिले में उचाना के पास अलीपुर गांव के रहने वाले है. लेफ्टिनेंट हरदीप की कहानी कड़ी मेहनत, लगन और अपनी काबिलियत पर विश्वास की कहानी है. जब वह दो साल से भी कम उम्र के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था और उनकी मां संतरो देवी ने पूरी जिम्मेदारी उठाई. उन्होंने एक स्कूल में मिड-डे मील वर्कर के तौर पर काम करती हैं और महीने में 800 रुपये कमाती हैं और खेतो में मजदूरी का भी काम करती हैं. संतरो देवी ने बड़े ही संघर्ष और कड़ी मेहतन से बेटे का पढ़ाया और यहां तक पहुंचाया.
मेरिट में 54वें स्थान पर थे हरदीप
यह उनका नौवां SSB अटेम्प्ट था, जिसे उन्होंने क्लियर किया और ऑल-इंडिया मेरिट लिस्ट में वह 54वें स्थान पर आने के बाद 2024 में IMA में शामिल हुए थे. बड़े होते हुए, हरदीप को एहसास हुआ कि उसे भी अपनी मां की मदद करनी चाहिए ताकि घर का खर्च चल सके. पढ़ाई करते हुए वह खेतों में भी काम करते थे. गिल ने गांव के स्कूल से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की है. उनकी दो बड़ी बहनें भी हैं.
इग्नू से पूरा किया ग्रेजुएशन
उन्होंने बताया कि एयरमैन की वैकेंसी के लिए चुने गए लगभग 3,000 लोगों में से, मैं ऑल-इंडिया मेरिट लिस्ट में 59वें नंबर पर था, लेकिन दुख की बात है कि वह सपना तब टूट गया, जब सरकार ने उन सभी सिलेक्शन को रोक दिया और उसकी जगह अग्निपथ योजना शुरू कर दी. इसके बाद उन्होंने IGNOU से ग्रेजुएशन पूरा करने और फिर कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा पास की. उन्होंने 8 बार एसएसबी इंटरव्यू नहीं क्लीयर कर पाएं. लेफ्टिनेंट हरदीप गिल सिख लाइट इन्फैंट्री की 14वीं बटालियन में शामिल होंगे.
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