नई जेनरेशन का वर्क कल्चर
भारत में अब नौकरी करने का तरीका और सोच दोनों बदल रहे हैं. आज की नई पीढ़ी यानी Gen Z, सिर्फ सैलरी के पीछे नहीं भाग रही, बल्कि काम में फ्लेक्सिबिलिटी, गोल्स और आत्मनिर्भरता को ज्यादा महत्व दे रही है. यह बदलाव कंपनियों के लिए एक नए दौर की शुरुआत साबित हो रहा है.
नौकरी के साथ वर्क-लाइफ बैलेंस भी
रैंडस्टैड इंडिया की ताजा रिपोर्ट ‘The Gen Z Workplace Blueprint’ के मुताबिक 1997 से 2007 के बीच जन्मे युवा अपने करियर को नए तरीके से परिभाषित कर रहे हैं. यह पीढ़ी मानती है कि सिर्फ लंबे समय तक किसी नौकरी में टिके रहना सफलता की निशानी नहीं है. उनके लिए वर्क-लाइफ बैलेंस, फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑवर्स और बेहतर सैलरी के साथ आजादी से काम करने का मौका ज्यादा मायने रखता है.
छुट्टी और ट्रैवल अब जरूरी फैक्टर
रिपोर्ट के मुताबिक, आज की जेनरेशन को सिर्फ ऑफिस की चार दीवारों में रहना पसंद नहीं. वे काम के साथ-साथ ट्रैवल, रिमोट वर्क और विदेश से काम करने जैसी सुविधाओं को भी अहम मानते हैं. कई युवा ऐसे जॉब्स चुन रहे हैं जो उन्हें दुनिया देखने और नई चीजें सीखने का मौका दें.
AI को लेकर उत्साह और डर दोनों
रिपोर्ट के अनुसार, 82% जेन Z प्रोफेशनल्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बेहद उत्साहित हैं. वे मानते हैं कि AI उनके काम को आसान बना रहा है और उन्हें नई स्किल्स सीखने में मदद करता है. लेकिन इसके साथ ही 44% युवा चिंतित भी हैं कि कहीं यह टेक्नोलॉजी भविष्य में उनकी नौकरी के लिए खतरा न बन जाए. फिर भी 52% युवा नियमित रूप से AI से जुड़ी स्किल्स हासिल कर रहे हैं.
कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती और मौका
रैंडस्टैड इंडिया के CEO, विश्वनाथ PS के मुताबिक, जो कंपनियां फ्लेक्सिबल पॉलिसी, समावेशी माहौल और लगातार सीखने के अवसर देंगी, वही Gen Z टैलेंट को आकर्षित कर पाएंगी. आज की जेनरेशन चाहती है कि उनकी कंपनी उनके ग्रोथ में निवेश करे और उनके आइडियाज की कद्र करे.
पुरानी सोच को अलविदा
पुरानी पीढ़ियां जहां स्थिरता और पेंशन जैसी चीजों को अहम मानती थीं, वहीं Gen Z के लिए काम में मकसद और स्वतंत्रता ज्यादा जरूरी है. वे ऐसे एम्प्लॉयर्स को पसंद करते हैं जो उन्हें बढ़ने, सीखने और अपने तरीके से काम करने की आजादी दें.

