सोने के दाम अपने पीक से करीब 13 हजार रुपए तक नीचे आ चुके हैं.
करीब दो हफ्तों में सोने की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है. देश के वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने की कीमतें अपने पीक से करीब 13 हजार रुपए प्रति दस ग्राम तक गिर गई हैं. अब ऐसे में सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सोने की कीमतें और गिरेंगी. या फिर गोल्ड एक बार फिर से बाउंसबैक कर सकता है. जानकारों की मानें तो दोनों ही बातें संभव हो सकती है. उसका कारण भी है. मौजूदा समय में गोल्ड को गिराने और उसे सपोर्ट करने दोनों ही फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं.
जहां एक ओर अमेरिकी फेड रिजर्व की पॉलिसी की मीटिंग में संभावित 25 बेसिस प्वाइंट कटौती गोल्ड को सपोर्ट करती हुई दिखाई दे सकती है. वहीं दूसरी ओर अमेरिका और चीन के बीच की ट्रेड डील गोल्ड की कीमतों में और गिरावट का संकेत दे रही है. वैसे बुधवार को देश के वायदा बाजार में सोने की कीमतों में शुरुआती गिरावट के बाद तेजी देखने को मिली है और कारोबारी सत्र के दौरान एक हजार रुपए से ज्यादा का इजाफा देखने को मिल रहा है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर जानकार इस मामले में किस तरह की सलाह दे रहे हैं?
पीक 13 हजार रुपए नीचे आया गोल्ड
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने की कीमतें अपने लाइफ टाइम हाई से लगभग 13,000 रुपये गिर गई हैं, जिससे उन निवेशकों में चिंता पैदा हो गई है जो कुछ हफ़्ते पहले ही सोने की कीमतों में तेजी के रुझान का मजा उठा रहे थे. 1,32,294 रुपए प्रति 10 ग्राम के लाइफ टाइम हाई से, सोना बुधवार को कारोबारी सत्र के दौरान करीब 10 फीसदी की गिरावट के साथ 1,19,351 रुपए पर आ गया. इसका मतलब है कि सोना अपने पीक से 12,943 रुपए नीचे आ चका है. इससे कई लोग यह सोच रहे हैं कि क्या यह एक गहरी गिरावट की शुरुआत है या लंबी अवधि में खरीदारी का एक अच्छा मौका है. अभी तक का ट्रेंड काफी उतार-चढ़ाव भरा देखने को मिला है. साथ ही प्रमुख ग्लोबल फैक्टर्स से पहले ट्रेड में अस्थिरता हावी रही है.
कौन से फैक्टर पड़ रहे भारी?
ऑगमोंट में रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी ईटी की रिपोर्ट में विस्तार से बात करते हुए कहती हैं कि अमेरिका-चीन ट्रेड टेंशन कम होने के संकेतों के साथ, सुरक्षित निवेश के रूप में सर्राफा की अपील कुछ हद तक कम हो गई है. जिससे सोने की कीमतें 4000 डॉलर और चांदी 47 डॉलर से नीचे आ गई हैं. अब बाजार के खिलाड़ी इस सप्ताह फेडरल रिजर्व की ब्याज दर के फैसले का इंतजार कर रहे हैं.
अमेरिका और चीन के बीच संभावित व्यापार युद्धविराम को लेकर आशावाद ने सोने की चमक को कुछ हद तक फीका कर दिया है. चैनानी के अनुसार टॉप चीनी और अमेरिकी आर्थिक अधिकारियों ने रविवार को एक व्यापार समझौते की शर्तों पर काम किया, जिस पर इस सप्ताह के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग द्वारा फैसला लिया जाएगा.
लेकिन निवेशक केवल इसी फैक्टर पर नजर नहीं रख रहे हैं. फेड का आगामी ब्याज दर निर्णय सोने की चाल को काफी प्रभावित कर सकता है. चैनानी ने कहा कि यदि फेड इस सप्ताह की अनुमानित दर में कमी के साथ नरम रुख अपनाता है, तो गोल्ड की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती ळै. उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कम ब्याज दर का माहौल एक बार फिर सोने जैसी नॉन-यील्ड वाले असेट्स की मांग को एक बार फिर से जीवित कर सकता है.
क्या है जानकारों का अनुमान?
यह गिरावट सिर्फ ग्लोबल बाजारों तक ही सीमित नहीं है. घरेलू सोना वायदा भी दबाव में है. मंगलवार को एमसीएक्स दिसंबर अनुबंध 1.08 फीसदी की गिरावट के साथ 1,19,646 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान सोना कुछ देर के लिए 1,18,450 रुपये तक गिर गया, फिर आंशिक रूप से सुधर गया. पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन का मीडिया रिपोर्ट में कहना है कि कीमतों ने अपने हाल के निचले स्तरों का परीक्षण किया है, लेकिन कुछ तकनीकी सपोर्ट अभी भी बरकरार हैं. सोना 3,870 डॉलर के अपने ‘करो या मरो’ स्तर पर बना हुआ है और चांदी 46.50 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अपने समर्थन स्तर पर बनी हुई है.
उन्हें उम्मीद है कि फेड पॉलिसी मीटिंग और अमेरिका-चीन मोर्चे पर किसी भी घटनाक्रम के बीच इस हफ़्ते सोने में उतार-चढ़ाव बना रहेगा. उन्होंने कहा कि सोने के 3,870-4,280 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस और चांदी के 45.50-51.50 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है. भारतीय बाजारों में, जैन ने इस सप्ताह सोने के लिए 1,17,000-1,18,000 रुपए के स्तर पर सपोर्ट और 1,20,500-1,21,400 रुपए के स्तर पर रसिसटेंस का अनुमान लगाया है. यदि ये स्तर बने रहते हैं, तो उनका मानना है कि 1,21,500 रुपये तक की रिकवरी संभव है, जबकि चांदी निकट भविष्य में 1,47,000 रुपये के स्तर को छू सकती है.
इस हफ्ते ये फैक्टर करेंगे अपना काम
एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च एनालिस्ट, कमोडिटी एंड करेंसी), जतिन त्रिवेदी, फेड मीटिंग और हालिया जियो पॉलिटिकल इंडीकेटर्स से पहले धारणा में तेजी की ओर इशारा करते हैं. अमेरिका-चीन ट्रेड डील को लेकर नए उत्साह के बाद धारणा नकारात्मक होने से सोना 2,500 रुपए की और गिरावट के साथ 1,18,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. अब ध्यान बुधवार रात को अमेरिकी फेड के ब्याज दर संबंधी फ़ैसले पर है, जो इस रुझान के अगले चरण को दिशा देगा. उन्होंने कहा कि सोना 1,16,500-1,18,000 रुपए पर प्रमुख सपोर्ट के साथ दबाव में बना हुआ है, जबकि 1,21,000-1,22,000 रुपए के आसपास रसिस्टेंस देखा जा रहा है.
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
इस समय, विश्लेषक सतर्क बने हुए हैं, और आगे गिरावट की संभावना को नकार नहीं रहे हैं, बल्कि 1,17,000 रुपये के आसपास समर्थन की संभावना की ओर भी इशारा कर रहे हैं. व्यापक आर्थिक अनिश्चितता और तकनीकी कमज़ोरी के दोहरे प्रभाव का मतलब है कि आने वाले दिनों में व्यापारियों को भारी अस्थिरता देखने को मिल सकती है.
हालांकि कुछ लॉन्गटर्म निवेशक हालिया गिरावट को एक एंट्री प्वाइंट के रूप में देख सकते हैं, विश्लेषक कोई दिशात्मक मोड़ लेने से पहले फेड की भाषा और अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन पर कड़ी नजर रख रहे हैं. तब तक, कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है. जैसा कि मनोज जैन कहते हैं कि सोने और चांदी में मौजूदा स्तरों पर शॉर्ट कवरिंग देखी जा रही है और लॉन्गटर्म इंवेस्टर्स को अपनी लॉन्ग पोजीशन बनाए रखनी चाहिए.
