पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। इजराइल और लेबनान अपने युद्धविराम (Ceasefire) को आगे बढ़ाने के लिए सहमत हो गए हैं। इस समझौते के तहत लेबनान के भीतर प्रायोगिक तौर पर कुछ विशेष ‘सुरक्षा क्षेत्र’ (Security Zones) बनाए जाएंगे, जहाँ हिजबुल्ला के लड़ाकों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।
इसे भी पढ़ें: Muzaffarpur Hospital Fire | मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल के आईसीयू में भीषण आग लगने से तीन मरीजों की मौत
अमेरिका की मध्यस्थता में विदेश मंत्रालय में हुई चौथे दौर की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने कहा कि यह युद्धविराम तभी प्रभावी रहेगा ‘‘जब हिजबुल्ला पूरी तरह हमले बंद करे और लितानी नदी के दक्षिण के इलाकों से अपने सभी लड़ाकों को हटा ले।’’
अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि ये सुरक्षा क्षेत्र किस तरह स्थापित किए जाएंगे। हालांकि, समझौते में कहा गया है कि उन क्षेत्रों की पूरी जिम्मेदारी लेबनान की सेना को सौंपी जाएगी।
बयान में यह भी कहा गया, ‘‘ये कदम व्यापक शांति और सुरक्षा समझौते का मार्ग प्रशस्त करेंगे।’’
इसमें कहा गया, ‘‘सभी देशों ने इस बात पर जोर दिया कि इजराइल और लेबनान के बीच संबंधों का भविष्य दोनों की संप्रभु सरकारें ही तय करेंगी और किसी भी देश या गैर-राज्यीय समूह को लेबनान का भविष्य बंधक बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’’
दरअसल, यह ईरान की ओर संकेत था जो हिजबुल्ला का समर्थन करता है और इस बात पर जोर देता रहा है कि ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ होने वाले किसी संभावित समझौते के तहत लेबनान पर इजराइली हमले रोके जाएं।
इजराइल-लेबनान वार्ता में हिजबुल्ला शामिल नहीं है।
इसे भी पढ़ें: Crude Oil संकट से बढ़ेगी महंगाई? Petrol-Diesel की मांग घटी, देश की Economy पर मंडराया बड़ा खतरा।
इस समझौते को मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि लेबनान की सेना इन सुरक्षा क्षेत्रों को हिजबुल्ला से मुक्त रखने में सफल रहती है, तो यह आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच एक मजबूत और सुरक्षित सीमा रेखा का आधार बन सकता है।
Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi

