इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 की मौत.
इंदौर के भागीरथपुरा मोहल्ले में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों के मामले में नगर निगम अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है. जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि जिस नर्मदा पाइपलाइन में ड्रेनेज का पानी मिल रहा था, उसे महीनों पहले ही बदला जाना था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की. इस लापरवाही का खामियाजा आम नागरिकों को अपनी जान और सेहत से चुकाना पड़ा.
जानकारी के अनुसार, भागीरथपुरा इलाके की नर्मदा पाइपलाइन बदलने के लिए 8 अगस्त को टेंडर जारी किया गया था. टेंडर खरीदने की अंतिम तिथि 15 सितंबर शाम 6 बजे तक तय की गई थी, जबकि टेंडर 17 सितंबर को दोपहर 12 बजे खोला जाना था. इस दौरान सात कंपनियों ने 2.40 करोड़ रुपए के इस टेंडर में हिस्सा लिया था. सभी कंपनियों ने तय समय सीमा के भीतर टेंडर भर दिए थे, जिनमें से एक कंपनी का टेंडर तकनीकी कारणों से रिजेक्ट किया गया.
आयुक्त और अपर आयुक्त पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि तय तारीख पर टेंडर खोलने के बजाय इसे 100 से ज्यादा दिन तक दबाकर रखा गया. अंततः 29 दिसंबर को शाम साढ़े चार बजे टेंडर खोला गया. इस देरी के पीछे नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है. आरोप है कि निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव और अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया ने समय पर टेंडर खोलने में कोई रुचि नहीं दिखाई.
…तो बच जाती भागीरथपुरा के लोगों की जान
यदि टेंडर प्रक्रिया निर्धारित समय पर पूरी कर ली जाती तो अब तक भागीरथपुरा इलाके की पाइपलाइन बदली जा चुकी होती. ऐसे में नर्मदा जल में ड्रेनेज का पानी मिलने की समस्या शायद समय रहते खत्म हो जाती और कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारियों की उदासीनता और टालमटोल के कारण ही यह गंभीर स्थिति बनी.
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मामले के उजागर होने के बाद नगर निगम ने केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया, जबकि असली निर्णय लेने वाले अधिकारी अब भी सवालों के घेरे में हैं. यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि समय पर लिए गए फैसले किस तरह बड़े हादसों को टाल सकते हैं.
6 महीने पहले मेयर ने पाइपलाइन बदलने को कहा था
एक दिन पहले दूषित पानी पीने से लोगों की मौत के मामले पर TV9 डिजिटल ने बड़ा खुलासा किया था. भागीरथपुर मोहल्ले बीते 6 महीने से लोग दूषित पानी पी रहे थे. लोगों ने नगर निगम के साथ-साथ CM हेल्पलाइन पर इसकी शिकायत की थी. 6 महीने पहले ही इंदौर मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने पाइपलाइन बदलने के लिए टेंडर जारी करने को कहा था, लेकिन सिस्टम की लापरवाही ऐसी थी कि वो टेंडर आज तक स्वीकृत नहीं हुए. मेयर ने निगम कमिश्नर को जांच के आदेश दिए हैं कि आखिर टेंडर 6 महीने से क्यों नहीं दिए गए?

