मुख्यमंत्री सिद्धारमैया
कर्नाटक सरकार ने पर्यावरण को लेकर खास पहल शुरू की है. प्रदेश के सरकारी दफ्तरों, बैठकों और समारोहों में अब प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल नहीं होगा. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सभी विभागाध्यक्षों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पर्यावरण के अनुकूल मैटेरियल से बनी बोतलों का इस्तेमाल करें. उन्होंने सरकारी दफ्तरों में नंदिनी डिश के इस्तेमाल का भी आदेश दिया है.
सीएम सिद्धारमैया ने इस बारे में ट्वीट करते हुए कहा, “सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक समारोहों में प्लास्टिक की बोतलों के बजाय पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बने बर्तनों का उपयोग करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं.”
निर्देश का कड़ाई से हो पालन
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा, “सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक समारोहों में प्लास्टिक की बोतलों के बजाय पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों से बने बर्तनों का उपयोग करने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं. इसका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए.
ಸರ್ಕಾರಿ ಕಚೇರಿಗಳು ಹಾಗೂ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಸಭೆ ಸಮಾರಂಭಗಳಲ್ಲಿ ಪ್ಲಾಸ್ಟಿಕ್ ಬಾಟಲಿಗಳ ಬದಲಾಗಿ ಪರಿಸರ ಸ್ನೇಹಿ ವಸ್ತುಗಳಿಂದ ತಯಾರಿಸಿದ ಪರಿಕರ ಬಳಕೆ ಮಾಡುವಂತೆ ಈ ಹಿಂದೆಯೇ ಸೂಚನೆ ನೀಡಲಾಗಿದ್ದು, ಅದನ್ನು ಕಟ್ಟುನಿಟ್ಟಾಗಿ ಪಾಲನೆ ಮಾಡುವುದು ಮತ್ತು ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿಗಳ, ಸಚಿವರುಗಳ ಸಭೆಗಳಲ್ಲಿ, ಸರ್ಕಾರದ ಎಲ್ಲಾ ಸಭೆ – ಕಾರ್ಯಕ್ರಮಗಳಲ್ಲಿ ಸರ್ಕಾರಿ pic.twitter.com/PT92bJXfXW
— Siddaramaiah (@siddaramaiah) October 31, 2025
उन्होंने कहा, “मैंने सरकार के मुख्य सचिवों को इसका कड़ाई से पालन करने और मुख्यमंत्री, मंत्रियों तथा सभी सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में सरकारी स्वामित्व वाले केएमएफ के नंदिनी व्यंजनों का उपयोग अनिवार्य करने का निर्देश दिया है.”
राज्य के विश्वविद्यालयों में होगा ये बदलाव
इसके अलावा सरकार राज्य के कुछ विश्वविद्यालयों को नए नाम भी बदलने की तैयारी कर रही है. इस कड़ी में सामाजिक न्याय के प्रवर्तक विश्वगुरु बसवण्णा, कीर्तनों के माध्यम से सामाजिक जागरूकता लाने वाले कनकदास, आधुनिक कर्नाटक के निर्माण की आधारशिला रखने वाले नालवडी कृष्णराज ओडेयार और परिवर्तन के सूत्रधार डी. देवराज अरसु के नामों पर राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों का नामकरण करने पर विचार किया जा रहा है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को अगले मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को लाने का निर्देश दिया है.

