सोमवार, 2 नवंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभिनेता इमरान खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए बेहद कड़ी और महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अभिनेता इमरान खान ने ‘फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस’ (FRRO) द्वारा उन्हें जारी किए गए ‘लीव इंडिया नोटिस’ (भारत छोड़ने के नोटिस) को अदालत में चुनौती दी थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया’ (OCI) कार्डधारक होने का अर्थ यह कतई नहीं है कि किसी विदेशी नागरिक को भारत में राजनीतिक या सामाजिक विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने का अधिकार मिल जाता है। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना की पीठ ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में कहा: “यदि किसी व्यक्ति ने किसी अन्य देश में ऐसी गतिविधि की होती, तो उसे अब तक वहां से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया होता।”
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान, इमरान खान के पक्ष ने कोर्ट को बताया कि उन्हें कभी पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया था।
हालांकि, कोर्ट ने उनसे यह स्पष्ट करने को कहा कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था या नहीं। सरकार ने पीठ को बताया कि इस मामले में एक केस दर्ज किया गया है।
इमरान खान की ओर से पेश वकील ने बताया कि अभिनेता के पास अमेरिकी पासपोर्ट है और वे 2006 से काम की तलाश में हैं। वकील ने एक हलफनामा देने की पेशकश भी की, जिसमें कहा गया कि इमरान खान ने न तो किसी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है और न ही ऐसा करने का उनका कोई इरादा है। मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर किसी ने अमेरिका सहित किसी अन्य देश में ऐसी गतिविधि की होती, तो उसे अगली ही फ्लाइट से देश से बाहर निकाल दिया जाता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि OCI कानून के तहत, OCI कार्ड धारकों को विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सवाल किया कि जब इमरान खान भारत में रहते हैं और काम करते हैं, तो उन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन क्यों नहीं किया? पीठ ने फिर दोहराया कि OCI कार्ड धारकों को इस तरह के अधिकार नहीं मिलते हैं।

