चाबहार पोर्ट
भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर ऑपरेशन के लिए यूएस सैंक्शन्स में छूट को अगले साल की शुरुआत तक बढ़ा दिया है, जिससे ये सुनिश्चित हो गया कि नई दिल्ली की सबसे इम्पोर्टेंट रीजनल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में से एक अनइफेक्टेड रहेगी.
CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस डिसीजन से भारत को अपनी पब्लिक सेक्टर कंपनी, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) के थ्रू शहीद बेहेश्टी टर्मिनल का ऑपरेशन कंटिन्यू रखने की परमिशन मिल गई है. छूट का रिन्यूअल एक बड़ी रिलीफ के रूप में आया है, जिससे भारत को पाकिस्तान से बायपास करके ह्यूमैनिटेरियन और ट्रेड एक्टिविटीज कंटिन्यू रखने और अफगानिस्तान तथा सेंट्रल एशिया के साथ रिलेशन्स को स्ट्रॉन्ग करने में हेल्प मिलेगी.
चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट क्या है?
साउथ-ईस्ट ईरान में स्थित चाबहार पोर्ट, भारत के लिए स्ट्रैटेजिकली सबसे इम्पोर्टेंट मैरीटाइम प्रोजेक्ट्स में से एक है. ये ईरान के थ्रू अरबियन सी तक भारत का ओनली डायरेक्ट एक्सेस पॉइंट है, जो पाकिस्तान को बायपास करता है. इस प्रोजेक्ट का पर्पज अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया, स्पेशली उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान जैसे कंट्रीज के लिए एक शॉर्टर और मोर रिलाएबल ट्रेड रूट प्रोवाइड करना है.
2024 में साइन किए गए 10-ईयर एग्रीमेंट के तहत, भारत IPGL के जरिए शहीद बेहेश्टी टर्मिनल का ऑपरेशन करता है, जो पोर्ट ऑपरेशन्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और ट्रेड रूट एनहांसमेंट की ओवरसी करता है. इस पोर्ट को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से भी कनेक्ट किया जा रहा है, जो भारत, ईरान, रशिया और सेंट्रल एशिया को जोड़ने वाला एक मेजर ट्रेड नेटवर्क है.
भारत की बड़ी जीत
CNN-News18 के मुताबिक, छूट के एक्सटेंशन से भारत चाबहार पोर्ट का डेवलपमेंट बिना किसी इंटरप्शन के कंटिन्यू रख सकेगा, जिससे इम्पोर्टेंट रीजनल ट्रेड रूट्स ओपन रहेंगे. भारत इस पोर्ट का यूज अफगानिस्तान और अन्य लैंडलॉक्ड कंट्रीज को व्हीट और मेडिकल सप्लाईज भेजने के लिए करता रहा है, जहां पाकिस्तान के रूट से पहुंचना पॉसिबल नहीं है.
ये प्रोजेक्ट रीजन में चाइना के बढ़ते इन्फ्लुएंस का काउंटर करने के भारत के ब्रॉडर फॉरेन पॉलिसी ऑब्जेक्टिव्स के भी अलाइनमेंट में है. चाइना ने ईरान के चाबहार के राइवल, पाकिस्तान-बेस्ड ग्वादर पोर्ट में हैवी इन्वेस्टमेंट किया है, जो बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का पार्ट है. चाबहार में अपनी प्रेजेंस बनाए रखकर, भारत इकॉनॉमिक और स्ट्रैटेजिक दोनों तरह से बैलेंस अचीव कर रहा है.
