जन सुराज पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने शानदार कमबैक किया. 203 सीटों पर जीत दर्ज कर एनडीए एक बार फिर से बिहार की सत्ता पर काबिज होगी. वहीं इस चुनाव में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी का खाता तक नहीं खुला.चुनाव नतीजों के बाद पार्टी ने दावा किया है कि मतदाताओं का एक वर्ग आरजेडी के शासन में जंगल राज की वापसी के डर से एनडीए के साथ चला गया.
प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने शनिवार (15 नवंबर) को कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के जंगलराज की आशंका के कारण जनसुराज के मतदाता आखिरी समय में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पक्ष में चले गए. उन्होंने कहा कि RJD के आने से जंगल राज लौटने का डर था इसलिए मतदाताओं ने NDA को वोट दिया. कई लोग, जो हमें मौका देना चाहते थे, उन्होंने इसी डर से एनडीए को वोट दिया.
‘सीमांचल क्षेत्र में ध्रुवीकरण हुआ’
चुनाव परिणाम घोषित होने के एक दिन बाद राजधानी पटना में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने यह भी दावा किया कि 11 नवंबर को मतदान से एक दिन पहले दिल्ली में लाल किले के पास हुए विस्फोट के बाद सीमांचल क्षेत्र में ध्रुवीकरण हुआ. उन्होंने कहा कि ध्रुवीकरण की राजनीति का लाभ भी एनडीए को मिला.
‘एनडीए को मिला भारी बहुमत खरीदा हुआ’
सिंह ने आरोप लगाया कि एनडीए को मिला भारी बहुमत खरीदा हुआ है. उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले राज्य की एनडीए सरकार ने वोट हासिल करने के लिए 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए. उन्होंने कहा कि ‘मेरा वोटर (मतदाता) इस डर से कि कहीं जनसुराज को वोट देने से आरजेडी सत्ता में ना आ जाए, आखिरी क्षणों में एनडीए को वोट दे गया.
‘चुनाव के नतीजों से निराश हैं, लेकिन परेशान नहीं’
उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि मुस्लिम भाइयों ने उनकी पार्टी पर पर्याप्त भरोसा नहीं जताया. उन्होंने कहा कि भविष्य में उनका समर्थन मिलने की उम्मीद है.उन्होंने कहा कि हम विधानसभा चुनाव के नतीजों से निराश हैं , लेकिन परेशान नहीं हैं. उन्होंने कहा कि हमने एक भी सीट नहीं जीती है, फिर भी हम सत्तारूढ़ एनडीए का विरोध करते रहेंगे.उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसुराज अपने मुद्दों को लेकर जनता के बीच में सक्रिय रहेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी विधानसभा में तो नहीं लेकिन पूरे राज्य में विपक्ष की भूमिका निभाएगी.

