नई दिल्ली:राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-NCR) में हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ने और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंचने के बाद ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के नियम कड़े कर दिए गए हैं। बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने और लोगों को निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने नेटवर्क पर मेट्रो फेरों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। नए फैसले के तहत अब दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क पर रोजाना 40 अतिरिक्त ट्रिप संचालित की जा रही हैं।
ग्रैप-2 लागू होते ही 20 नए फेरे जोड़े गए
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा ग्रैप के दूसरे चरण (GRAP-II) के प्रतिबंध लागू किए जाने के तुरंत बाद DMRC ने यह कदम उठाया।
– चरणबद्ध बढ़ोतरी: ग्रैप-1 लागू होने के समय ही डीएमआरसी ने कार्यदिवसों (सोमवार से शुक्रवार) पर 20 अतिरिक्त फेरे शुरू कर दिए थे।
– अब कुल 40 ट्रिप: ग्रैप-2 लागू होने के साथ ही 20 और अतिरिक्त फेरे जोड़े गए हैं, जिससे अब मेट्रो नेटवर्क पर कुल 40 अतिरिक्त फेरे लगाए जा रहे हैं। – पीक आवर्स पर फोकस: यह अतिरिक्त सेवाएं विशेष रूप से सुबह और शाम के व्यस्त समय (पीक आवर्स) में उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि यात्रियों को स्टेशनों और ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ का सामना न करना पड़े और वेटिंग टाइम कम हो सके।
निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य
सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर की हवा में जहरीले कणों और स्मॉग की परत मोटी होने लगती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं इस प्रदूषण का एक प्रमुख कारक है।
DMRC के अधिकारियों का कहना है कि मेट्रो सेवाओं के विस्तार का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी कार और दोपहिया वाहन घर पर छोड़कर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है। सड़क पर वाहनों की संख्या कम होने से सीधे तौर पर उत्सर्जन और ट्रैफिक जाम में कमी आएगी, जिसका असर हवा की गुणवत्ता पर सकारात्मक रूप से दिखेगा।
ग्रैप-2 के तहत अन्य कड़े उपाय
दिल्ली मेट्रो के फेरे बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासन ने शहरभर में कई अन्य सख्त पाबंदियां भी लागू की हैं:
– पार्किंग शुल्क में वृद्धि: निजी वाहनों के प्रयोग को हतोत्साहित करने के लिए नगर निगमों और संबंधित प्राधिकरणों को पार्किंग फीस बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
– डीजल जनरेटर पर पाबंदी: आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य वाणिज्यिक या आवासीय उपयोग के लिए डीजल जनरेटर सेट चलाने पर रोक लगाई गई है।- धूल नियंत्रण और पानी का छिड़काव: सड़कों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग और एंटी-स्मॉग गन के जरिए पानी का नियमित छिड़काव तेज कर दिया गया है।
– दफ्तरों के समय में बदलाव की सलाह: सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव एक समय पर न बढ़े, इसके लिए सरकारी व निजी संस्थानों को स्टैगर्ड ऑफिस टाइमिंग (अलग-अलग कामकाजी घंटे) अपनाने की सलाह दी गई है।
यात्रियों से सहयोग की अपील
DMRC ने यात्रियों से अपील की है कि वे प्रदूषण नियंत्रण के इस साझा प्रयास में सहयोग करें और रोजाना आवागमन के लिए मेट्रो को प्राथमिकता दें। यदि आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘गंभीर’ श्रेणी (GRAP-III या GRAP-IV) की ओर बढ़ता है, तो मेट्रो सेवाओं में आवश्यकतानुसार और अधिक फेरे जोड़े जा सकते हैं, ताकि सार्वजनिक परिवहन प्रणाली पूरी तरह मुस्तैद रहे।
