दिल्ली विश्वविद्यालय
दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज में आयोजित ओथ सेरेमनी कार्यक्रम के दौरान एक प्राध्यापक द्वारा राजनैतिक द्वेष के चलते विद्यार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज एवं मारपीट जैसी घटनाएं की गईं. यहां पहले भी प्राध्यापक पर पहले भी कॉलेज परिसर में खुलेआम धूम्रपान, मद्यपान करने एवं छात्रों को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लग चुके हैं. जब इस घटना की शिकायत डूसू से की गई तो एबीवीपी नीत डूसू अध्यक्ष आर्यन मान और संयुक्त सचिव दीपिका झा विद्यार्थियों की समस्या को लेकर कॉलेज पहुंचे.
इस दौरान प्राचार्य मीडिया से बातचीत के दौरान कथित प्राध्यापक की ओर से संयुक्त सचिव दीपिका झा के प्रति अभद्र टिप्पणी व गाली-गलौज की गई. इससे यह स्पष्ट प्रतीत हो रहा था की वह प्राध्यापक आज भी नशे की हालत में था. दीपिका झा ने संबंधित प्राध्यापक से परेशान आकर पुलिस से हस्तक्षेप की मांग भी की. पुलिस की ओर से तत्काल कार्रवाई न करने और लगातार अभद्र व्यवहार किए जाने और डूसू सयुक्त सचिव को लगातार धमकी दिए जाने की वजह से तुरंत आवेश में हुई प्रतिक्रिया अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसका विद्यार्थी परिषद किसी भी रूप में समर्थन नहीं करती है.
आरोपी प्राध्यापक के खिलाफ हो कार्रवाई
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कहा कि अभाविप और डूसू संयुक्त सचिव दीपिका झा शिक्षकों के सम्मान के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं. यह घटना किसी भी प्रकार से शिक्षक समुदाय का अपमान करने के उद्देश्य से नहीं हुई, बल्कि यह राजनैतिक द्वेष और अनुशासनहीनता का विरोध करते हुए क्षणिक प्रतिक्रिया थी जिसका किसी भी शैक्षिक परिसर में कोई भी स्थान नहीं है. साथ ही अभाविप (ABVP) कॉलेज प्रशासन से यह भी मांग करती है कि आरोपी प्राध्यापक द्वारा विद्यार्थियों के प्रति दुराचरण के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक जांच की जाए. और परिसर में मद्यपान, धूम्रपान एवं राजनैतिक द्वेष्ता में छात्रों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं पर सख्त नियंत्रण स्थापित किया जाए.
अभाविप प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सदैव शिक्षक-छात्र संबंधों की गरिमा में विश्वास रखती है. किसी भी परिस्थिति में शैक्षिक परिसर में शिक्षक के साथ अभद्रता या अपमान का कोई स्थान नहीं है. अभाविप इस घटना पर अत्यंत खेद प्रकट करती है. परंतु साथ ही जब कोई प्राध्यापक अपने पद की मर्यादा का उल्लंघन कर छात्रों को राजनीतिक द्वेष के कारण प्रताड़ित करता है या अनुशासनहीन व्यवहार करता है, तो यह पूरे शिक्षण समुदाय की छवि को आघात पहुंचाता है. शिक्षा परिसरों में शिक्षक विद्यार्थियों के संरक्षक होते हैं. अभाविप इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग करती है और अपेक्षा करती है कि दोषी प्राध्यापक पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि विद्यार्थी ख़ुद को शिक्षकों के बीच सुरक्षित पायें और भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं फिर से न हों.’
