Small Finance Banks वित्त वर्ष 2025 में सबसे बैंकिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा जॉब दी है.Image Credit source: ChatGPT
देश के बैंकिंग सेक्टर में बीते कुछ सालों में काफी बदलाव देखने को मिला है. जहां कई बैंकों का मर्जर हो गया. वहीं कुछ बैंक इतने बड़े हो हैं कि देश के कई कॉरपोरेट ग्रुप्स को टक्कर दे रहे हैं. वहीं स्मॉल फाइनेंस बैंकों की एंट्री ने देश के दिग्गज बैंकों को कड़ी टक्कर दी है. हाल ही में आरबीआई का जो आंकड़ा सामने आया है, उससे ये बात समझ में आई है कि छोटे बैंक बड़े धमाके से कम नहीं है. जॉब देने के मामले में स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने बड़े बैंकों को पीछे छोड़ दिया है. यहां तक वित्त वर्ष 2025 में छोटे बैंकों ने जॉब देने के मामले में बीते 5 बरस का रिकॉर्ड तक तोड़ डाला है. वहीं बड़े प्राइवेट बैंकों में जॉब में कमी देखने को मिली है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर आरबीआई की रिपोर्ट किस तरह की कहानी बयां कर रही है.
एसएफबी ने दी सबसे ज्यादा जॉब
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फ्रेश आंकड़ों के अनुसार, स्मॉल फाइनेंस बैंक वित्त वर्ष 2025 में 26,736 रिक्रूटमेंट के साथ भारतीय बैंकिंग सेक्टर में बड़े जॉब क्रिएटर के रूप में उभरे हैं, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है. प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने अपनी रिक्रूटमेंट प्रोसेस को थोड़ा कम किया है. जिसकी वजह से वित्त वर्ष 2024 तक के तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष 75,000 से 1,00,000 कर्मचारियों को रिक्रूट करने के बाद वित्त वर्ष 2025 में कर्मचारियों की संख्या में 7,257 की कमी आई. यही वजह है कि स्मॉल फाइनेंस बैंक वित्त वर्ष 2025 में सबसे बड़े बैंकिंग रिक्रूटर बन गए हैं.
डिपॉजिट और लोन में इजाफा
वहीं दूसरी ओर लोन और डिपॉजिट में 1 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी को देखते हुए उनके ऑपरेशन का साइज ना के बराबर देखने को मिला है; फिर फिर भी सार्वभौमिक बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त करने के प्रयासों के चलते छोटे बैंकों ने पिछले पांच वर्षों में काफी ग्रोथ दर्ज की है; वित्त वर्ष 2020 और वित्त वर्ष 2025 के बीच उनके लोन और डिपॉजिट में क्रमशः लगभग 25 फीसदी और 34 फीसदी का ग्रोथ देखने को मिला है. जबकि बैंकिंग सिस्टम में कुल लोन और डिपॉजिट का सालाना ग्रोथ 11-13 फीसदी ही रहा है.
एसएफबी में क्यों आई रिक्रूटमेंट में तेजी?
एक्सपर्ट का मानना है कि स्मॉल फाइनेंस में हो रही आक्रामक भर्ती का कारण उनकी ग्रोथ संबंधी महत्वाकांक्षाएं हैं, विशेष रूप से बैलेंस शीट का विस्तार करने और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने की योजनाएं. कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी और सीईओ सर्वजीत सिंह समरा ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि एसएफबी में भर्ती की गति साइकलिक नहीं बल्कि स्ट्रक्चरल है. उन्होंने बताया कि असेट क्वालिटी, देनदारी प्रोफाइल और गवर्नंस फ्रेमवर्क को स्थिर करने के बाद एसएफबी मैच्योर हो गए हैं. समरा ने आगे कहा कि ये बैंक विशेष रूप से सब-अर्बन और ग्रामीण बाजारों में सक्रिय रूप से शाखाएं और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं.
5 सालों में डबल हुई संख्या
एसएफबी में कर्मचारियों की संख्या वित्त वर्ष 2020 में 95,249 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 1.8 लाख हो गई, जो 13.3 फीसदी की ग्रोथ है. इस अवधि के दौरान देश की बैंकिंग सिस्टम में कुल कर्मचारियों की संख्या में सालाना 4.3 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली है. खास बात तो ये है कि सरकारी बैंकों के कर्मचारियों की संख्या में 0.8 फीसदी की कमी देखने को मिली है. वैसे देश में बैंकों में काम करने वालों की संख्या 18.1 लाख तक पहुंच गई. वित्त वर्ष 2026 में भी एसएफबी द्वारा भर्तियों की रफ्तार बरकरार रही. 11 एसएफबी में से आठ लिस्टेड बैंकों ने पहले छह महीनों में ही लगभग 9,000 कर्मचारियों को नियुक्त किया है.
यूनिवर्सल बैंकिंग की राह पर एसएफबी
कई एसएफबी यूनिवर्सल बैंकिंग में परिवर्तन के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं, जिसके चलते वे रेगुलेटर की स्वीकृतियों से काफी पहले ही अपने ऑपरेशन का विस्तार कर रहे हैं. आरबीआई द्वारा हाल ही में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को यूनिवर्सल बैंक में परिवर्तित करने की मंजूरी इस ट्रेड को उजागर करती है. उज्जिवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने पिछले साल फरवरी में यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, जबकि जना स्मॉल फाइनेंस बैंक ने जून में आवेदन किया. इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने भी यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त करने में रुचि दिखाई है.

