साल 2026 कि सेंसेक्स 1 लाख के लेवल को पार कर सकता है.
गोल्ड के बाद अब सेंसेक्स एक लाख के लेवल का रिकॉर्ड बनाने की तैयारी कर रहा है. खास बात तो ये है कि सेंसेक्स का ये रिकॉर्ड अगले 7 से 8 महीनों में देखने को मिल सकता है. इसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से जून 2026 तक सेंसेक्स में करीब 20 फीसदी की तेजी देखने को मिल सकती है. इस बात की संभावना किसी और ने नहीं बल्कि अमेरिका की दिग्गज एजेंसी मॉर्गन स्टानले ने जताई है. एजेंसी का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर खत्म हो गया है. अब दुनिया के सभी उभरते बाजारों की तुलना में भारत के शेयर बाजार में तेजी लाने वाले फैक्टर सामने आ रहे हैं. जिसकी वजह से संभावना जताई जा रही है कि भारत का शेयर बाजार दुनिया के बाकीउभरते बाजारों के मुकाबले में निवेशकों को ज्यादा रिटर्न देता हुआ दिखाई देगा. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर मॉर्गन स्टानले की ओर से किस तरह की भविष्यवाणी की गई है.
शेयर बाजार जाएगा एक लाख के पार!
मॉर्गन स्टानले की रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार में जून 2026 तक तेजी की संभावना जताई गई है. रिपोर्ट का कहना है कि इस बात की 30 फीसदी संभावना है कि जून 2026 तक सेंसेक्स 100,000 के लेवल को छू लेगा. रिपोर्ट में एक और संभावना भी जताई गई हे. रिपोर्ट कहती है कि 50 फीसदी संभावना इस बात की है कि सेंसेक्स समान अवधि में सिर्फ 6.6 फीसदी तक बढ़ेगा और 89 हजार अंकों के लेवल पर जाएगा. वैसे रिपोर्ट एक वर्स्ट सिचुएशन को भी दिखाया गया है. मॉर्गन स्टानले के अनुमान है कि 20 फीसदी संभावना सेंसेक्स के 70 हजार अंकों के आने की भी है. जोकि मौजूदा लेवल से 16 फीसदी की गिरावट दिखा रहा है.अगर बात शेयरों की करें तो मॉर्गन स्टानले का मारुति सुजुकी, ट्रेंट, टाइटन कंपनी, वरुण बेवरेजेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी), अल्ट्राटेक सीमेंट और कोफोर्ज ऐसे 10 भारतीय शेयर पर दबदबा बना हुआ है.
परिवर्तन के दौर से गुजर रहा बाजार
मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जो ब्रॉडर इकोनॉमिक फैक्टर्स से प्रेरित होगा और शेयर चुनने का महत्व शायद कम हो जाएगा. मॉर्गन स्टेनली के एमडी और मुख्य भारत इक्विटी रणनीतिकार, रिधम देसाई ने नयनत पारेख के साथ मिलकर लिखी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत का ग्रोथ साइकिल तेज होने वाला है.
उन्होंने कहा कि विकास में यह तेज़ी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और सरकार द्वारा ब्याज दरों में कटौती, कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) में कटौती, बैंकों से रेगुलेटिड और लिक्विडिटी में कमी, कैपेक्स में इजाफा और लगभग 1.5 ट्रिलियन रुपए की GST दरों में कटौती के जरिए रीइंफ्लेशन प्रयासों से समर्थित है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के साथ संबंधों में नरमी और चीन का अंतर्विरोध भी इसमें शामिल है. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की संभावना से सेंटीमेंट को और बल मिलेगा. इस प्रकार, कोविड के बाद भारत का आक्रामक वृहद आर्थिक रुख अब कम हो रहा है. साथ ही वैल्यूएश में करेक्श देखने को मिला है और अक्टूबर में संभवतः एक लोअर लेवल पर पहुंच गया है.
मॉर्गन स्टेनली का तर्क है कि भारत की जीडीपी में तेल की घटती हिस्सेदारी और जीडीपी में निर्यात, विशेष रूप से सेवाओं, के बढ़ते हिस्से और फिस्कल कंसोलिडेशन से बचत असंतुलन में कमी का संकेत मिलता है. रिपोर्ट के अनुसार, इससे स्ट्रक्चरल रूप से वास्तविक दरें कम होंगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि साथ ही, सप्लाई पक्ष और नीतिगत बदलावों की वजह से महंगाई में कम अस्थिरता का मतलब है कि आने वाले वर्षों में ब्याज दरों और विकास दर में अस्थिरता कम होने की संभावना है.
रिस्क और ट्रिगर
मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए उनके अनुमानों में नेगेटिव रिस्क, धीमी ग्लोबल ग्रोथ और बिगड़ती भू-राजनीति से उत्पन्न होते हैं. आगे बढ़ते हुए, देसाई और पारेख को ‘सकारात्मक’ आय संशोधन, आगामी तिमाही में RBI द्वारा ब्याज दरों में कटौती, पब्लिक सेक्टर की कंपनियों के प्राइवेटाइजेशन और भारत पर कम अमेरिकी टैरिफ की उम्मीद है, जो उनके अनुसार भारतीय इकोनॉमी और बाजारों में तेजी के लिए प्रमुख फैक्टर के रूप में काम करेंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) की स्थिति निचले स्तर के आसपास बनी हुई है, लेकिन शुद्ध FPI खरीदारी के लिए वृद्धि में सुधार और/या अन्य जगहों पर तेजी के बाज़ारों के थमने, साथ ही कॉर्पोरेट इश्यूज में वृद्धि की आवश्यकता होगी.

