लगातार दूसरे कारोबारी दिन डॉलर के मुकाबले में रुपए में तेजी देखने को मिली. जानकारों की मानें तो डॉलर में गिरावट की वजह से रुपए में इजाफा देखने को मिला है. वैसे विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली ने इस तेजी को सीमित कर दिया. वर्ना बाजार की सूरत और भी बेहतर हो सकती थी. वैसे मंगलवार को जब आखिरी बार करेंसी मार्केट ओपन हुआ था, तब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा रुपए को मिलता हुआ दिखाई दिया था, लेकिन गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है. अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या डॉलर और अमेरिकी टैरिफ का असर असर खत्म हो रहा है? ये सवाल इसलिए है क्योंकि रुपए में लगातार दूसरे कारोबारी दिन तेजी देखने को मिली है. वैसे एक्सपर्ट का मानना है कि अभी ये कहना काफी जल्दबाजी होगी. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर गुरुवार को करेंसी मार्केट में किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं?
रुपए में लगातार दूसरे दिन इजाफा
गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर (अनंतिम) के मुकाबले 10 पैसे बढ़कर 88.60 पर पहुंच गया, जिसे प्रमुख विदेशी प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले अमेरिकी करेंसी के कमजोर प्रदर्शन का समर्थन मिला. विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजारों में सुस्त धारणा और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी ने भारतीय करेंसी में तेज बढ़त को रोक दिया. इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में, रुपया 88.51 पर खुला और डॉलर के मुकाबले 88.49 के उच्च स्तर को छुआ. यह 88.66 के लोअर लेवल को भी छू गया, लेकिन अंत में डॉलर के मुकाबले 88.60 (अनंतिम) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर से 10 पैसे अधिक है.
क्यों आई रुपए में तेजी?
डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से रुपए को सहारा मिला, हालांकि, एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एवं करेंसी के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने कहा कि लगातार विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली ने रुपये की तेजी की गति को सीमित कर दिया, जिससे घरेलू मुद्रा पर हल्का दबाव बना रहा. त्रिवेदी ने कहा कि बाजार सहभागियों का ध्यान अब इस सप्ताह जारी होने वाले प्रमुख अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर है, जिनमें आईएसएम विनिर्माण और गैर-विनिर्माण पीएमआई शामिल हैं, जो डॉलर की चाल और वैश्विक जोखिम धारणा को प्रभावित कर सकते हैं. निकट भविष्य में रुपया 88.40-88.90 के बीच कारोबार करते हुए सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है.
सर्विस सेक्टर रहा धीमा
गुरुवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के सर्विस सेक्टर की वृद्धि दर अक्टूबर में पिछले पांच महीनों में सबसे धीमी रही, क्योंकि प्रतिस्पर्धी दबाव और देश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के कारण उत्पादन में वृद्धि धीमी रही. मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स सितंबर के 60.9 से गिरकर अक्टूबर में 58.9 पर आ गया, जो मई के बाद से विस्तार की सबसे धीमी गति को दर्शाता है.
डॉलर इंडेक्स में बड़ी गिरावट
इस बीच, छह मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.23 प्रतिशत गिरकर 99.83 पर आ गया. वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 1.10 प्रतिशत बढ़कर 64.22 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया. घरेलू शेयर बाजारों में, सेंसेक्स 148.14 अंक या 0.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,311.01 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 87.95 अंक या 0.34 प्रतिशत गिरकर 25,509.70 पर बंद हुआ. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को 1,067.01 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे.
