रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
देश में रक्षा मंत्रालय की तरफ से लगातार सेनाओं को मजबूत करने के लिए कई तरह के काम किए जा रहे हैं. हथियार से लेकर एडवांस तकनीकों को भी शामिल किया जा रहा है. इसी को लेकर अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने R&D में निजी उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है. उनका कहना है कि भारत की R&D प्रगति केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र के नवाचार से संभव है.
रक्षा मंत्री कार्यालय ने कहा कि R&D में सरकार के अलावा प्राइवेट इंडस्ट्री पर भी बड़ी जिम्मेदारी है. भारतीय इंडस्ट्री को वह काम करना है, जो देश में अभी तक नहीं हुआ है. इस देश के प्राइवेट सेक्टर ने, देश को pharmaceutical, Information technology और telecom sector जैसे, न जाने कितने सेक्टर में pioneer बनाया है. रिसर्च और डेवलपमेंट के क्षेत्र में भी देश को आपसे यही उम्मीद है.
R&D के बिना कोई आगे नहीं बढ़ सकता- राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोई भी देश हो, वह R&D के बिना आगे नहीं बढ़ सकता है. चाहे अमेरिका हो, चीन हो या साउथ कोरिया हो, जो भी देश आगे गए हैं, वह R&D की वजह से ही गए हैं. सीखने के लिए तो हमें किसी से भी, कहीं से भी सीखना चाहिए. हम तो आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः, यानी Let noble thoughts come to me from all directions की सोच को मानने वाले लोग हैं. दुनिया में कहीं भी, अगर कोई अच्छी practice हो रही है, तो उसको अपनाने में हमें पीछे नहीं हटना चाहिए.
रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि हम private sector के साथ collaborate करके आगे बढ़ें. इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम अगर मिलकर इस दिशा में काम करते हैं, तो आने वाले समय में यह एक गेम चेंजर साबित हो सकता है, जो डिफेंस सेक्टर की पूरी तस्वीर बदल देगा.
आगे कहा कि सरकार ने प्राइवेट सेक्टर पर भी भरोसा जताया है, और उसी का परिणाम है, कि आज हम semiconductor fabrication जैसे important और critical क्षेत्र में भी, मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं. आज देशभर में लगभग 10 fabrication plants established हो रहे हैं.
आत्मनिर्भरता पर दिया जोर
राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता का जो विचार है, वह हमारी सरकार के लिए सिर्फ एक slogan भर नहीं है, बल्कि भारत की ही पुरानी परंपरा का आधुनिक रूप है. इतिहास में एक समय ऐसा भी था, जब हमारा लगभग हर गांव अपने आप में इंडस्ट्री था. भारत सोने की चिड़िया इसलिए कहलाता था, क्योंकि हम अपनी जरूरतों के लिए बाहर की ओर नहीं देखते थे, उसे अपनी ही जमीन पर पूरा करते थे. Manufacturing और high technology में indigenization को priority देकर, हमने उसी परम्परा को आधुनिक रूप देने का प्रयास किया है.
indigenous platforms ने भारत की साख को बढ़ाया- राजनाथ
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राजनाथ सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन की सफलता का श्रेय हमारे सैनिकों के साथ-साथ, उन सबको भी जाता है, जो पीछे रहकर उस मिशन को सफल बनाने में लगे हुए थे. आप जैसे industry warriors, जिन्होंने innovation, डिजाइन और manufacturing के मोर्चे पर, tirelessly काम किया, वह भी इस जीत के उतने ही हकदार हैं.
आगे कहा कि हम सबने देखा, कि कैसे आकाश मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस, AkashTeer Air डिफेंस कंट्रोल सिस्टम और अन्य कई प्रकार के indigenous equipment, platforms ने ऑपरेशन सिदूर के दौरान अपना पराक्रम दिखाया. हमारे indigenous platforms की सफलता ने, न केवल रीजनल बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी, भारत की साख को बढ़ाया है.
