अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन से पहले ट्रंप खूब चिल्लाए थे। फ्रांस के खूब उदाहरण दिए थे। इटली हो, फ्रांस हो, अल्बेनिया हो, यूरोप के तमाम वो देश जिन देशों ने ओपन बॉर्डर पॉलिसी अपनाई थी, जहां इलीगल इमीग्रेंट्स आए थे और जिस तरीके से पिछले 21 सितंबर से लगातार फ्रांस जल रहा है। मतलब डेढ़ महीने के आसपास । उन लोगों का तमाम तरीके से हर लहजे में हर तरीके से उदाहरण दिया कि अगर ये मुस्लिम इमीग्रेंट्स आते हैं किसी विदेश में तो ये आपका वहां तबाही लेकर आते हैं। मेरी जो पॉलिसी है जिस तरीके से मैं इललीगल इमीग्रेंट्स को देश से वापस भेज रहा हूं उनकी तारीफ होनी चाहिए और उनके अगर आप अमेरिका में भी इस तरीके से आने देंगे तो यहां भी आपको वही सब देखने को मिलेगा जो यूरोप में देखने को मिला, फ्रांस इटली में देखने को मिला। लेकिन इस मिड टर्म इलेक्शन में यह सारा चुनाव प्रचार ट्रंप के लिए कोई काम नहीं आया। वहां एक फिलिस्तीन मूल की महिला जो हिजाब पहनकर चुनाव लड़ रही थी। मतलब ट्रंप ने ये कहा था कि आप इस तरीके से चुनाव को लेकर चलिए। आप चुनाव में इस तरीके से वोट करिएगा। यह मानकर कि हर सीट पर ट्रंप चुनाव लड़ रहे हैं। तो ऐसे में क्या यह मान लिया जाए कि अब कवास ने आपका डोनाल्ड ट्रंप को चुनावी मैदान में हरा दिया है।
इसे भी पढ़ें: अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएंगे…अमेरिका में अल सैयद की जीत पर ओवैसी ने UP के मुस्लमानों को दिया बड़ा मैसज
अमेरिका की मदद से अमेरिका की फंडिंग से अमेरिका के हथियारों से अमेरिका की टेक्नोलॉजी से अमेरिका के साथ से उस अमेरिका में फिलिस्तीन मूल की एक महिला सांसद चुनकर आती है विधायिका का हिस्सा हो जाती है जबकि वो इससे पहले अमेरिका के द्वारा इजराइल को फंडिंग दी जाती थी गाज़ा के लिए उसका विरोध कर चुकी हैं। उसके बावजूद लोगों ने अगर वोट किया है तो मतलब अमेरिका में यह मुद्दा नहीं है इललीगल इमीग्रेंट्स का या फिर मुस्लिम्स का। जोहरान ममदानी भी इससे पहले चुनाव जीत चुके हैं।
इसे भी पढ़ें: लागत दक्षता से Bayer CropScience का मुनाफा बढ़ा, CFO विनीत जिंदल ने दी जानकारी
कौन है ये एबर कवास
ये न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट डिस्ट्रिक्ट 12 की सीट पर इन्होंने जीत हासिल की है। जीत के बाद कवास ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हमने इतिहास रच दिया फर्स्ट पैलेस्तीनियन इेड इन न्यूयॉर्क स्टेट। ब्रुकलिन की रहने वाली 34 वर्षीय फिलिस्तीनी अमेरिकी अब कवास ने 74.3% वोट हासिल किए। मतलब रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार हानखोट को बड़े अंतर से नहीं बल्कि बहुत बड़े अंतर से उन्होंने हराने का काम किया है। कवास ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरा ममदानी और सेनेटर बरनी सेंडर्स के समर्थन के प्राइमरी चुनाव में जीत हासिल की थी और राज्य की दावेदारी पक्की की थी।
अमेरिका में ये प्राइमरी चुनाव क्या होता है?
जिस तरीके से अमेरिका में सिर्फ मुख्य तौर पर दो पार्टी चुनाव लड़ती है। एक डेमोक्रेट एक रिपब्लिकन। अब इसे इस तरीके से ले लीजिए जैसे वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ते हैं और बीजेपी में ही कुछ और उम्मीदवार भी ऐसे हैं जो वाराणसी सीट से चुनाव लड़ना चाहती है। तो पार्टी सबको चुनाव लड़ने के लिए कह देती है कि सब लड़िए। उसके लिए प्राइमरी इलेक्शन होता है। प्राइमरी इलेक्शन में लोग वोट करते हैं या फिर लोगों की पसंद लोगों से पूछा जाता है आप किसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं? तो उसे ही चुनाव लड़ाया जाता है। यहां हो सकता है कि जिस सीट से इन्होंने चुनाव लड़ा जब प्राइमरी इलेक्शन करवाना पड़ा तो मतलब और लोग भी यहां डेमोक्रेटिक पार्टी से चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे होंगे और उन सबके ऊपर मतलब जोहरान ममदानी का भी इन्हें समर्थन मिला तब जाकर इन्हें टिकट मिला और ये चुनाव में जीती हैं।

