इसरो साइंटिस्ट जयन एनImage Credit source: Social Media
Who is Jayan N: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बीते दिनों साइंस, टेक्नाेलॉजी समेत इससे जुड़े क्षेत्रों में विशेष काम करने वाले साइंटिस्टों को नेशनल साइंस अवार्ड 2025 से सम्मानित किया है. इसमें जयन एन भी शामिल हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जयन एन को स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए नेशनल साइंस अवार्ड 2025 से सम्मानित किया है. इसके बाद से वह एक बार फिर चर्चा में है. उन्हें ISRO के राॅकेट की स्वदेशी उड़ान सुनिश्चित करने वाला साइंटिस्ट माना जाता है.
आइए जानते हैं कि नेशनल साइंस अवार्ड 2025 से सम्मानित जयन एन कौन हैं? जानेंगे कि उनकी पढ़ाई कहां से हुई है और उनके पास कौन सी डिग्री है? साथ ही जानेंगे कि जयन एन ने स्पेस टेक्नोलॉजी में कौन से काम किए हैं, जिन्हें देखते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जयन एन को नेशनल साइंस अवार्ड से सम्मानित किया है.
केरल जयन एन इसरो के VSSC में हैं साइंटिस्ट
नेशनल साइंस अवार्ड 2025 से सम्मानित जयन एन की पहचान देश-दुनिया में एक प्रमुख स्पेस साइंटिस्ट की है. वह मूलत: केरल के रहने वाले हैं. वहीं जयन एन मौजूदा समय में इंंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) में साइंटिस्ट के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. वह विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में NGLV के प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं. इससे पहले वह लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर में डिप्टी डायरेक्टर थे.
जयन एन की कहां से हुई है पढ़ाई? जानें उनके पास कौन सी डिग्री
ISRO के VSSC में साइंटिस्ट के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे जयन एन की प्रांरभिक शिक्षा केरल से हुई पूरी हुई है. इसके बाद उन्होंने कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग तिरुवनंतपुरम से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक पूरा किया. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) में एडमिशन लिया. IISc से उन्होंनेएयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की है. IISc में उन्होंने गोल्ड मेडल प्राप्त किया था.
ISRO के लिए क्रायोजेनिक इंजन बनाया
नेशनल साइंस अवार्ड 2025 से सम्मानित किए गए जयन एन ने स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी में विशेष काम किया है. उन्होंने GSLV प्रोग्राम में इस्तेमाल होने वाले भारत के पहले स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन के डिजाइन और डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभाई. यानीउन्होंने इसरो के रॉकेट के लिए स्वेदशी इंजन बनाया है, जिसे क्रायोजेनिक इंजन कहा जाता है. इस स्वदेशी इंजन की वजह से इसरो के खर्च में कमी आई तो वहीं रिसर्च में भी मदद मिली है. कुल जमा दुनियाभर की रिसर्च एजेंसियों के बीच इसरो की साख बढ़ाने में क्रायोजेनिक इंजन की भूमिका अहम मानी जाती है. इस स्वदेशी इंजन को जयन ए और उनकी टीम ने बनाया है. अब वह नेक्स्ट जेन व्हीकल लॉन्च पर काम कर रहे हैं. उन्हें इससेपूर्व कई अवार्ड मिल चुके हैं.

