Middle East War Updates । समंदर के अंदर तबाही का दूसरा नाम ‘Mark-48’
Middle East War Updates । मार्क-48 (Mark-48) टॉरपीडो लंबे समय से अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी युद्ध क्षमता की रीढ़ रहा है। 1972 में पहली बार पेश किए गए इस हथियार को दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को खत्म करने के लिए बनाया गया है।
वजन और वारहेड: इसका वजन लगभग 1,700 किलोग्राम है और इसमें लगा शक्तिशाली विस्फोटक बड़े से बड़े समुद्री जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
सटीक निशाना: यह पानी के अंदर सक्रिय और निष्क्रिय ‘सोनार’ तकनीक का इस्तेमाल करता है, जिससे दुश्मन के बचने की कोशिश करने पर भी यह उसे ट्रैक कर लेता है।
कील-ब्रेकिंग तकनीक: यह टॉरपीडो सीधे जहाज से टकराने के बजाय उसके नीचे जाकर फटता है। इससे पानी के अंदर गैस का एक विशाल बुलबुला बनता है, जो जहाज की मुख्य बीम (कील) को तोड़ देता है। इससे जहाज बीच से दो हिस्सों में बंटकर तेजी से डूब जाता है।
रफ्तार: यह 100 किमी/घंटा से भी ज्यादा की रफ्तार से दर्जनों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य पर हमला कर सकता है।
अमेरिकी नौसेना इसे अपनी ‘लॉस एंजिल्स’, ‘सीवुल्फ’ और ‘वर्जीनिया’ क्लास जैसी आधुनिक पनडुब्बियों पर तैनात रखती है।

