यूके वीजा नियमImage Credit source: Getty Images
ब्रिटेन द्वारा 2025 में लागू की गई नई इमीग्रेशन नीतियों ने भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर बड़ा असर डाला है. स्वास्थ्य सेवाओं, नर्सिंग और आईटी क्षेत्र में वर्क वीजा की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है. ब्रिटेन सरकार ने स्किल, सैलरी और भाषा मानकों को सख्त करते हुए वीजा प्राप्त करने की प्रक्रिया को पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है. साथ ही, छात्र वीजा और ग्रेजुएट रूट में हुए बदलावों ने भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद काम पाने की संभावना कम कर दी है. ये बदलाव ब्रिटेन की नेट माइग्रेशन (net migration) कम करने की रणनीति का हिस्सा हैं.
स्वास्थ्य और आईटी क्षेत्र पर प्रभाव
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, स्वास्थ्य एवं देखभाल वीजा 67% घटकर 16,606 पर आ गया है. नर्सिंग पेशेवर वीजा में तो 79% की भारी कमी दर्ज की गई है, जो अब सिर्फ 2,225 रह गया है. आईटी पेशेवरों पर भी इसका असर पड़ा है और उनके वीजा में लगभग 20% की कमी आई है.
22 जुलाई 2025 से लागू हुए इन सुधारों का उद्देश्य ब्रिटेन में कुशल प्रवासन को नियंत्रित करना है, जिसके चलते भारतीय स्वास्थ्य कर्मियों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए अवसर सीमित हो गए हैं.
नियम सख्त कर दिए
वर्क वीजा के साथ-साथ छात्र और स्नातकोत्तर गतिशीलता के नियम भी सख्त कर दिए गए हैं. प्रस्तावित बदलावों के अनुसार, लोकप्रिय ग्रेजुएट रूट वीजा की अवधि दो साल से घटाकर 18 महीने करने की तैयारी है. इसके अलावा, भाषा और वित्तीय आवश्यकताओं को भी अधिक कठिन बनाया जा रहा है.
इन सबके कारण भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद नौकरी हासिल करना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है. आश्रितों पर लगे प्रतिबंध ने भी छात्र माइग्रेशन के स्वरूप को बदल दिया है, जिससे अधिकतर छात्र अब केवल शिक्षा पर ही ध्यान दे रहे हैं.
भारत-ब्रिटेन संवाद जारी
हालांकि नीतियां सख्त हुई हैं, फिर भी भारत और ब्रिटेन के बीच 2021 के प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते जैसे ढांचों के तहत बातचीत जारी है. दोनों देश कुशल प्रवासन, व्यावसायिक अवसरों और पारस्परिक मान्यता के बारे में सहयोग बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं.
कुल मिलाकर, वीजा के पारंपरिक रास्ते सीमित हो रहे हैं, लेकिन संवाद और सहयोग से भारतीयों के लिए भविष्य में नए अवसर खुलने की उम्मीद बनी हुई है.

