TET को अनिवार्य करने के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन (सांकेतिक तस्वीर)Image Credit source: ebajyoti Chakraborty/Getty Images
Teacher Protest Against TET: सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों स्कूल में पढ़ाने के लिए योग्यता निर्धारित करते हुए एक बड़ा फैसला लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले में पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए भी टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (TET) को अनिवार्य कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से देशभर के शिक्षक परेशान हैं, जिसके विरोध में देशभर में शिक्षक 24 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जुटे हैं. मुख्य मांग अनिवार्य TET के फैसले को वापस लेने की है.
आइए इसी कड़ी में जानते हैं कि कितने राज्यों के शिक्षक प्रदर्शन के लिए जुट रहे हैं? जानेंगे कि अनिवार्य TET के फैसले से कितने शिक्षक प्रभावित हैं? जानेंगे कि क्या प्रदर्शन से शिक्षकों की इस मांग का समाधान हो सकता है, इसका रास्ता क्या है? जानेंगे कि उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्य सरकारें इसको लेकर क्या कर रही हैं?
20 लाख से अधिक शिक्षकों पर असर
सुप्रीम कोर्ट ने सभी शिक्षकों यानी पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए भी TET को अनिवार्य कर दिया है, जिसके तहत शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद भर्ती हुए सभी शिक्षकों को TET अनिवार्य रूप से पास करने होगा. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर देशभर के 20 लाख से अधिक शिक्षकों पर पड़ रहा है. TET पास ना होने से उनके प्रमोशन और नौकरी प्रभावित हो रही है.
22 राज्यों के शिक्षकों का प्रदर्शन
अनिवार्य TET के विरोध समेत पुरानी पेंशन की बहाली की मांग को लेकर 22 राज्यों के शिक्षक का जुटान जंतर-मंतर पर हुआ है. शिक्षक भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जुटे हैं. इस मोर्च के बैनर में कई शिक्षक संगठन शामिल हैं.
क्या है इस समस्या का समाधान
शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य किए जाने के विरोध में देशभर के शिक्षकों का जुटान हुआ है. कुल जमा शिक्षक इसको लेकर दवाब बना रहे हैं. आइए जानते हैं कि कैसे सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला बदला जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट में याचिका: शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता संंबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सुप्रीम कोर्ट ही खारिज कर सकता है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाई जा सकती है, जिसे अगर सुप्रीम कोर्ट स्वीकारता है तो दोबारा सुनवाई होगी. उसमें सुप्रीम कोर्ट शिक्षकों का पक्ष ले सकता है. हालांकि अगर दोबारा सुप्रीम कोर्ट शिक्षकों का पक्ष नहीं लेता है तो मुश्किलें ज्यादा बढ़ सकती हैं.
संसद में कानून : वहीं शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता संंबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद में कानून बना कर निष्प्रभावी बनाया जा सकता है. संसद में सरकार फैसले को निष्प्रभावी बनाने के लिए बिल लेकर आ सकती है, जिसे बहुमत मिलने पर वह पास होगा, फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद वह कानून बनेगा. इसके बाद शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है.
यूपी समेत 5 राज्य सरकार ने दायर की पुनर्विचार याचिका
TET का विरोध कर रहे शिक्षकों को यूपी समेत 5 राज्यों की सरकार का साथ मिला है. इस संबंध में यूपी, उत्तराखंड, तेलंगाना, केरल तथा मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की हुई है. हालांकि कई अन्य राज्य सरकारें भी इस तरह की तैयारी में हैं.

