राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025Image Credit source: Getty Images
भारत सरकार ने राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 के विजेताओं की घोषणा कर दी है. यह पुरस्कार देश के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इनोवेशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वैज्ञानिकों को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है. इसका उद्देश्य वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी ढांचे को और मजबूत बनाना है. IIT मद्रास के तीन प्रोफेसरों को राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 मिला है. जानें अवॉर्ड से जुड़ी पूरी डिटेल्स.
चार कैटेगरी में दिए गए पुरस्कार
राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार चार प्रमुख श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं, विज्ञान रत्न (VR), विज्ञान श्री (VS), विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर (VY-SSB) और विज्ञान टीम (VT). इन पुरस्कारों में फिजिक्स, रसायन विज्ञान, जैविक विज्ञान 9biological sciences), इंजीनियरिंग, मेडिकल, पर्यावरण, कृषि और स्पेस साइंस जैसे 13 क्षेत्रों को शामिल किया गया है.
अलग-अलग कैटेगरी का उद्देश्य और महत्व
विज्ञान रत्न पुरस्कार विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है, जबकि विज्ञान श्री उन वैज्ञानिकों को सम्मानित करता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण कार्य किया हो. विज्ञान युवा पुरस्कार 45 वर्ष से कम आयु के प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिकों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने शोध या इनोवेशन से नई दिशा दिखाई हो. वहीं, विज्ञान टीम पुरस्कार उन समूहों को मिलता है जिन्होंने सामूहिक रूप से अनुसंधान या इनोवेशन में उत्कृष्ट कार्य किया है.
पुरस्कार विजेताओं की लिस्ट और चयन प्रक्रिया
इस वर्ष विज्ञान रत्न पुरस्कार मरणोपरांत प्रोफेसर जयन्त विष्णु नार्लीकर को फिजिक्स में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए दिया गया है. विज्ञान श्री श्रेणी में कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया है, जिनमें शामिल हैं.
डॉ. ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह (कृषि विज्ञान),
डॉ. यूसुफ मोहम्मद शेख (परमाणु ऊर्जा),
डॉ. के. थंगराज (जैविक विज्ञान),
प्रो. प्रदीप थलप्पिल (रसायन विज्ञान),
प्रो. अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित (इंजीनियरिंग विज्ञान),
डॉ. एस. वेंकट मोहन (पर्यावरण विज्ञान),
प्रो. महान एम.जे (गणित और कंप्यूटर विज्ञान),
श्री जयन एन (अंतरिक्ष विज्ञान).
युवा वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी को मिला सम्मान
युवा कैटेगरी में आईआईटी, शोध संस्थानों और विश्वविद्यालयों के कई वैज्ञानिकों को चुना गया है, जिनमें डॉ. दीपा अगाशे, प्रोफेसर अमित कुमार अग्रवाल, प्रोफेसर श्वेता प्रेम अग्रवाल, डॉ. सुरेश कुमार और प्रोफेसर मोहनशंकर शिवप्रकाशम जैसे नाम प्रमुख हैं.
विज्ञान टीम पुरस्कार इस बार सीएसआईआर की अरोमा मिशन टीम को दिया गया है, जिसने कृषि विज्ञान में सामूहिक रूप से उत्कृष्ट योगदान दिया है.
IIT मद्रास के तीन प्रोफेसरों की खास उपलब्धि
इस वर्ष की सूची में आईआईटी मद्रास के तीन प्रोफेसरों, प्रो. प्रदीप थलप्पिल, प्रो. मोहनशंकर शिवप्रकाशम और प्रो. श्वेता प्रेम अग्रवाल ने विशेष स्थान बनाया है. तीनों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अपने इनोवेटिव रिसर्च और उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया है.
पारदर्शी चयन प्रक्रिया
इन पुरस्कारों के लिए नामांकन 4 अक्टूबर से 17 नवंबर 2024 तक राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल (awards.gov.in) के माध्यम से स्वीकार किए गए थे. चयन प्रक्रिया प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार की अध्यक्षता में गठित एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा की गई, जिसमें विभिन्न विज्ञान अकादमियों और विभागों के विशेषज्ञ शामिल थे.
युवाओं को प्रेरित करने वाला वैज्ञानिक सम्मान
राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 न केवल भारत के वैज्ञानिकों के योगदान का सम्मान हैं, बल्कि युवाओं को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करते हैं.
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