मखदुमपुर विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2025 Live Updates: बिहार में 2 चरणों में वोटिंग कराए जाने के बाद अब रिजल्ट की बारी है. विधानसभा चुनाव में सभी की नजर अब रिजल्ट पर टिक गई है. आज शुक्रवार को मतगणना कराई जा रही है. राज्य में पिछली बार की तरह इस बार भी राजनीतिक गठबंधनों के बीच ही मुकाबला है. जहानाबाद जिले में भी चुनाव को लेकर काफी हलचल देखी गई. यहां की रिजर्व मखदुमपुर सीट पर भी थोड़ी देर में शुरुआती रुझान सामने आने की उम्मीद है.
अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व मखदुमपुर विधानसभा सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है. इस बार रानी कुमारी, सुबेदार दास और शंकर स्वरूप के बीच ही कड़ा मुकाबला माना जा रहा है. रानी कुमारी एनडीए की ओर से चिराग की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास पासवान) के टिकट पर मैदान में उतरीं तो महागठबंधन की ओर से सुबेदार सिंह ने आरजेडी के टिकट से अपनी चुनौती पेश की. शंकर स्वरूप जन सुराज पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे. बिहार में इस बार वोटिंग 6 और 11 नवंबर को कराई गई. जहानाबाद जिले में दूसरे चरण के तहत 11 नवंबर को वोट डाले गए. इस सीट पर जीतन राम मांझी भी चुनाव लड़ चुके हैं.
2020 के चुनाव में कैसा रहा यहां का परिणाम
मखदुमपुर विधानसभा सीट पर 2020 के चुनाव में कुल 9 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी. लेकिन यहां पर मुख्य मुकाबला आरजेडी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (एस) के बीच रहा. आरजेडी के प्रत्याशी सतीश कुमार ने 22,565 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी. चुनाव में सतीश को 71,571 वोट आए तो जीतन राम मांझी की पार्टी हम (एस) के देवेंद्र कुमार को 49,006 वोट मिले थे.
ये भी पढ़ेंःविधानसभा चुनाव परिणाम की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें.
पूर्व सीएम जीतन राम मांझी को मिली थी हार
हाई प्रोफाइल और रिजर्व सीट मखदुमपुर पर खासतौर से मुकाबला आरजेडी और जेडीयू के बीच रहा है. 90 के दशक के बाद के राजनीतिक परिणाम को देखा जाए तो 1990 में कांग्रेस को आखिरी बार यहां से जीत हासिल हुई थी. फिर 1995 में यह सीट जनता दल के खाते में चली गई. तब बागी कुमार वर्मा यहां से चुनाव जीते. लेकिन वह 2000 में आरजेडी के टिकट पर लड़े और जीत हासिल की.
फरवरी 2005 के चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी के रामाश्रय प्रसाद सिंह मखदुमपुर से विधायक चुने गए. लेकिन नवंबर 2005 में आरजेडी के प्रत्याशी कृष्णानंद प्रसाद वर्मा को जीत मिली. 2010 में जेडीयू की ओर से केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी विजयी हुए. लेकिन 2015 के चुनाव से पहले जेडीयू छोड़कर नई पार्टी हम के टिकट पर चुनाव लड़ने उतरे जीतन राम को हार का सामना करना पड़ा. आरजेडी के सूबेदार सिंह विधायक चुने गए. 2020 में सूबेदार सिंह हम पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे लेकिन इस बार वह आरजेडी के सतीश कुमार के हाथों हार गए.

