ईरान के साथ महीनों तक चले तनाव के बाद भी अमेरिका को वह नतीजा नहीं मिला जिसकी उसे उम्मीद थी। अपनी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव, महंगाई और तेल संकट की चिंता के बीच वाशिंगटन अब एक बार फिर रूस के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में दिख रहा है। सवाल यह है कि जो अमेरिका अभी तक ईरान संकट के असर से पूरी तरह बाहर नहीं आ पाया है, वह अब रूस पर नए प्रतिबंधों का ऐलान क्यों कर रहा है? फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे संकेत दिए हैं जिससे रूस की अर्थव्यवस्था पर बड़ा हमला हो सकता है और अगर ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर भारत की जेब और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
ट्रंप का नया प्लान अब रूस पर दबाव
ईरान युद्ध के दौरान दुनिया को सबसे बड़ा डर था कि तेल की सप्लाई रुक जाएगी और कीमतें आसमान छूने लगेगी। यही वजह है कि अमेरिका ने कुछ देशों को रूस से तेल खरीदने में राहत दी थी ताकि बाजार में तेल की कमी ना हो। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। स्टेट ऑफ हॉर्मोस से तेल की आवाजाही फिर सामान्य होने लगी है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन रूस को मिलने वाली इस राहत को खत्म करने की तैयारी में है। मतलब साफ है कि अब अमेरिका फिर से रूस की कमाई पर चोट करना चाहता है ताकि यूक्रेन युद्ध में मॉस्को पर दबाव बढ़ाया जा सके। G7 देशों ने भी कसली कमर। सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि ब्रिटेन, कनाडा समेत कई G7 देशों ने भी रूस के तेल कारोबार को निशाना बनाने का फैसला किया है। रूस जिन गुप्त तेल टैंकरों और नेटवर्क के जरिए दुनिया भर में तेल बेच रहा है, उन पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस की युद्ध मशीन को रोकने का सबसे बड़ा तरीका उसकी तेल से होने वाली कमाई पर हमला करना है।
भारत की बढ़ी चिंता
ऐसे भारत की मुश्किलें शुरू होती हैं। पिछले कई महीनों में भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदा है। यही वजह रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल के बावजूद भारत में तेल की कीमतों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ा। लेकिन अगर अमेरिका रूस पर दोबारा सख्त प्रतिबंध लागू करता है तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल खरीदना मुश्किल हो सकता है। भुगतान से लेकर शिपिंग तक कई तरह की दिक्कतें सामने आ सकती हैं। 17 जून की डेडलाइन पर सबकी नजर। सबसे अहम बात यह है कि रूसी तेल पर दी गई अमेरिकी छूट की समय सीमा 17 जून को खत्म हो रही है। अगर इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाता तो दुनिया के तेल बाजार में फिर हलचल मच सकती है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और इसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है। मोदी ने भी जताई चिंता। G7 सम्मेलन में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक व्यापार और सप्लाई चैन प्रभावित हो रही है।
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