केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय की नई इमारत ‘सेवा तीर्थ’ के उद्घाटन के अवसर पर 100 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी करने की घोषणा की है। इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि यह सिक्का शुक्रवार को औपचारिक रूप से जारी किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह स्मारक सिक्का न केवल नई इमारत के उद्घाटन की ऐतिहासिक घड़ी को चिह्नित करेगा, बल्कि सुशासन और नागरिक-केन्द्रित प्रशासन के प्रतीक के रूप में भी याद रखा जाएगा।वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 100 रुपये के इस स्मारक सिक्के के डिजाइन में राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक संदेशों को प्रमुखता दी गई है। सिक्के के अगले हिस्से (अग्र भाग) पर भारत का राजचिह्न अशोक स्तंभ अंकित होगा, जिसके नीचे ‘सत्यमेव जयते’ लिखा रहेगा। इसके साथ ही बाईं ओर देवनागरी लिपि में ‘भारत’ और दाईं ओर अंग्रेज़ी में ‘INDIA’ अंकित किया जाएगा। यह स्वरूप भारतीय गणराज्य की आधिकारिक पहचान और संवैधानिक मूल्यों को दर्शाता है।
सिक्के के पिछले हिस्से (पृष्ठ भाग) पर ‘सेवा तीर्थ’ भवन की आकृति उकेरी जाएगी। इसके ऊपर और नीचे हिंदी तथा अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में ‘सेवा तीर्थ’ लिखा होगा। अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि सिक्के पर कमल के फूल की आकृति के साथ ‘नागरिकदेवो भव’ वाक्य हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में अंकित किया जाएगा। ‘नागरिकदेवो भव’ का संदेश नागरिकों को सर्वोपरि मानने और शासन को सेवा के रूप में देखने की भावना को रेखांकित करता है।
सरकार के अनुसार, ‘सेवा तीर्थ’ नाम स्वयं में एक प्रतीकात्मक अर्थ रखता है। ‘सेवा’ का तात्पर्य जनसेवा और उत्तरदायित्व से है, जबकि ‘तीर्थ’ का आशय पवित्र स्थल से है। इस नाम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय केवल प्रशासनिक कार्यों का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र और नागरिकों की सेवा का समर्पित स्थान है। नई इमारत अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बताई जा रही है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
स्मारक सिक्के आमतौर पर किसी विशेष अवसर, ऐतिहासिक घटना या महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के सम्मान में जारी किए जाते हैं। ये सिक्के सामान्य प्रचलन के लिए नहीं होते, बल्कि संग्राहकों और स्मृति के रूप में संरक्षित करने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं। 100 रुपये का यह सिक्का भी इसी श्रेणी में आएगा और सीमित संख्या में ढाला जाएगा। भारतीय टकसाल द्वारा निर्मित ऐसे सिक्के देश के इतिहास और उपलब्धियों को सहेजने का माध्यम बनते हैं।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में सिक्के की धातु संरचना, वजन और आकार संबंधी विवरण भी निर्धारित किए गए हैं, जिनका पालन भारतीय टकसाल द्वारा किया जाएगा। हालांकि यह सिक्का कानूनी निविदा (लीगल टेंडर) की श्रेणी में होगा, परंतु इसका मुख्य उद्देश्य संग्रहण और स्मृति चिह्न के रूप में उपयोग है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस पहल को प्रतीकात्मक महत्व दिया जा रहा है। समर्थकों का मानना है कि यह कदम शासन प्रणाली को ‘जनसेवा’ के रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में एक संदेश है। वहीं, आलोचकों का कहना है कि किसी भी नई इमारत से अधिक महत्वपूर्ण उसका उपयोग और कार्यप्रणाली है। हालांकि, सरकार का रुख स्पष्ट है कि ‘सेवा तीर्थ’ प्रशासनिक सुधारों और आधुनिक कार्यसंस्कृति का प्रतीक बनेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में स्मारक सिक्कों की परंपरा पुरानी है और समय-समय पर विभिन्न ऐतिहासिक अवसरों पर ऐसे सिक्के जारी किए जाते रहे हैं। ये सिक्के आने वाली पीढ़ियों के लिए उस दौर की पहचान और दस्तावेज़ बन जाते हैं। 100 रुपये का ‘सेवा तीर्थ’ स्मारक सिक्का भी इसी कड़ी में एक नया अध्याय जोड़ेगा।उल्लेखनीय है कि स्मारक सिक्के जारी करने की प्रक्रिया विधिवत अधिसूचना के माध्यम से होती है, जिसमें डिजाइन, मूल्यवर्ग और अन्य तकनीकी पहलुओं का स्पष्ट उल्लेख किया जाता है। वित्त मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी अधिसूचना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।कुल मिलाकर, ‘सेवा तीर्थ’ भवन के उद्घाटन के साथ 100 रुपये का यह स्मारक सिक्का प्रशासनिक इतिहास में एक प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है। यह सिक्का न केवल एक नई इमारत के उद्घाटन की स्मृति को संजोएगा, बल्कि शासन को सेवा और नागरिकों को सर्वोच्च मानने के संदेश को भी रेखांकित करेगा।
रिपोर्ट – अभिनव गुप्ता
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Desk SBN : ‘सेवा तीर्थ’ के उद्घाटन पर 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी करेगी मोदी सरकार
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