भारत और स्पेन के बीच उच्च शिक्षा सहयोग को नई दिशा देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने प्रमुख स्पेनिश विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने का आमंत्रण दिया। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित इंडिया–स्पेन उच्च शिक्षा सम्मेलन के समापन सत्र में की गई, जहां दोनों देशों के शिक्षा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सम्मेलन के दौरान संयुक्त शोध परियोजनाओं, फैकल्टी और छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रमों तथा स्टार्टअप सहयोग पर विस्तृत चर्चा की गई। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और नवाचार-आधारित शिक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत किया जाना आवश्यक है।
भारत में स्पेन के राजदूत Juan Antonio March Pujol ने कहा कि सम्मेलन में हुई चर्चाएं 2026 तक परिपक्व रूप लेंगी और इस वर्ष स्पेन में अगली बैठक आयोजित किए जाने की संभावना है। उन्होंने संकेत दिया कि आगामी बैठक में समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर भी हो सकते हैं, जिससे शैक्षणिक साझेदारी को औपचारिक रूप मिलेगा। उच्च शिक्षा सचिव Vineet Joshi ने इस सम्मेलन को “भविष्य उन्मुख” बताते हुए कहा कि यह पहल भारत की वैश्विक शिक्षा साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भारतीय छात्रों और शिक्षकों को नए अवसर मिलेंगे और शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं खुलेंगी। सम्मेलन में स्पेन के विश्वविद्यालयों के संगठन Conference of Rectors of Spanish Universities (CRUE) के प्रतिनिधियों सहित 70 से अधिक भारतीय संस्थानों ने भाग लिया। इस व्यापक भागीदारी ने दोनों देशों के बीच शैक्षणिक संवाद को और सशक्त बनाया।
बैठक में विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक और जिम्मेदार नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि एआई के विकास और उपयोग में नैतिक मानकों और सामाजिक उत्तरदायित्व का पालन आवश्यक है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत की नई शिक्षा नीति अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करती है और विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस स्थापित करने की अनुमति देती है। इससे भारतीय छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा अपने ही देश में प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्पेन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर स्थापित करते हैं, तो इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि शोध, नवाचार और उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंध और मजबूत होंगे। इस प्रकार, इंडिया–स्पेन उच्च शिक्षा सम्मेलन ने द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊर्जा दी है। आने वाले समय में प्रस्तावित समझौतों और संयुक्त पहलों के माध्यम से भारत और स्पेन के बीच शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में साझेदारी और गहरी हो सकती है।
रिपोर्ट – अभिनव गुप्ता
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Desk SBN : भारत–स्पेन उच्च शिक्षा सम्मेलन सहयोग को नई दिशा, स्पेनिश विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने का आमंत्रण
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