इंटरनेट मंचों पर डीपफेक सामग्री की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए वीडियो मंच यूट्यूब ने अपने ‘लाइकनेस डिटेक्शन’ उपकरण का दायरा बढ़ाने की घोषणा की है। अब यह सुविधा पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के लिए भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे अपने चेहरे या आवाज़ की नक़ल कर बनाए गए भ्रामक वीडियो को हटाने के लिए शिकायत दर्ज कर सकें।कंपनी ने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया कि इस उपकरण की शुरुआत अक्टूबर 2025 में की गई थी। उस समय इसका उद्देश्य मंच पर सक्रिय सामग्री निर्माताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। यह तकनीक ऐसे वीडियो की पहचान करने के लिए विकसित की गई है, जिनमें बिना अनुमति किसी व्यक्ति के चेहरे या आवाज़ की नकल की जाती है। इस कदम को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।कंपनी के अनुसार, पत्रकारों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेताओं के डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल अक्सर गलत सूचना फैलाने या सामाजिक अशांति पैदा करने के लिए किया जा सकता है। यही कारण है कि अब इस उपकरण को ऐसे लोगों तक भी विस्तारित किया जा रहा है जिनका सार्वजनिक प्रभाव अधिक होता है। इससे वे अपने नाम और पहचान का दुरुपयोग रोकने के लिए सीधे मंच से शिकायत कर सकेंगे।हालांकि, फिलहाल यह सुविधा सभी पत्रकारों या सरकारी अधिकारियों के लिए तुरंत उपलब्ध नहीं होगी। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह उपकरण अभी परीक्षण चरण में है और धीरे-धीरे अधिक लोगों तक पहुंचाया जाएगा। प्रारंभिक चरण में सीमित संख्या में उपयोगकर्ताओं को शामिल किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह प्रणाली उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सही तरीके से काम कर रही है।इस सुविधा का लाभ लेने के लिए पात्र उपयोगकर्ताओं को पहले मंच पर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपनी पहचान प्रमाणित करने के लिए फोटो पहचान पत्र और अपने चेहरे का एक छोटा वीडियो जमा करना होगा। इन सामग्रियों का उपयोग उनकी पहचान की पुष्टि करने और उनके चेहरे व आवाज़ का एक संदर्भ नमूना तैयार करने के लिए किया जाएगा।कंपनी के अनुसार, आवेदन प्राप्त होने के बाद विशेषज्ञों की एक टीम उसकी समीक्षा करेगी। सभी आवश्यक शर्तें पूरी होने पर उपयोगकर्ता को ई-मेल के माध्यम से सूचना भेजी जाएगी कि उसका पंजीकरण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इसके बाद वह मंच पर अपने नाम या चेहरे का दुरुपयोग करने वाले डीपफेक वीडियो की निगरानी और शिकायत दर्ज कर सकेगा।डिजिटल विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के प्रसार के साथ डीपफेक सामग्री का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में तकनीकी कंपनियों द्वारा उठाए गए इस प्रकार के कदम ऑनलाइन सुरक्षा और सूचना की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।कुल मिलाकर, यूट्यूब का यह नया कदम डिजिटल मंचों पर गलत सूचना और पहचान की चोरी जैसे खतरों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यदि इस सुविधा का दायरा और बढ़ाया जाता है तो इससे अधिक लोगों को अपनी डिजिटल पहचान सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट – अभिनव गुप्ता
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Desk SBN : डीपफेक पर सख्ती, यूट्यूब का ‘लाइकनेस डिटेक्शन’ अब पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों के लिए भी उपलब्ध
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