Karnataka Department of School Education ने 2026–27 शैक्षणिक सत्र से राज्य के सरकारी और अनुदानित स्कूलों में छात्रों के लिए AI आधारित फेस रिकग्निशन उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य करने का आदेश दोबारा जारी किया है। विभाग के इस निर्णय का उद्देश्य स्कूलों में उपस्थिति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सटीक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना बताया गया है।
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नई प्रणाली के तहत छात्रों की उपस्थिति मोबाइल फोन या टैबलेट के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग होगा, जो छात्रों के चेहरे की पहचान कर उनकी उपस्थिति स्वतः रिकॉर्ड करेगी। इस डिजिटल प्रणाली के लागू होने से फर्जी उपस्थिति, प्रॉक्सी अटेंडेंस और रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि पारंपरिक रजिस्टर प्रणाली में कई बार त्रुटियां हो जाती हैं या आंकड़ों में असंगति देखने को मिलती है। नई तकनीक से उपस्थिति का डेटा सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहेगा, जिससे स्कूल प्रबंधन और विभागीय अधिकारियों को वास्तविक समय (रियल टाइम) में सटीक जानकारी मिल सकेगी। इससे छात्रों की नियमित उपस्थिति पर निगरानी रखना भी आसान होगा।
इसी क्रम में विभाग ने ‘KAMS’ नामक मोबाइल ऐप को भी लागू किया है। यह ऐप शिक्षकों और स्कूल स्टाफ की उपस्थिति दर्ज करने के लिए इस महीने से अनिवार्य कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में स्टाफ के लिए डिजिटल अटेंडेंस लागू की गई थी, और अब दूसरे चरण में छात्रों के लिए फेस रिकग्निशन प्रणाली लागू की जा रही है।
विभाग का कहना है कि डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम से स्कूलों के प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि छात्र और शिक्षक दोनों नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं या नहीं। साथ ही, उपस्थिति से संबंधित डेटा का विश्लेषण कर उन क्षेत्रों की पहचान भी की जा सकेगी, जहां ड्रॉपआउट या कम उपस्थिति की समस्या अधिक है।
हालांकि, इस फैसले को लेकर कुछ अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने डेटा गोपनीयता और तकनीकी ढांचे को लेकर सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि छात्रों के बायोमेट्रिक या फेस डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। इस पर विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी डेटा सुरक्षित सर्वर पर संग्रहीत किए जाएंगे और गोपनीयता से संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, स्कूलों को आवश्यक तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे और शिक्षकों को इस नई प्रणाली के उपयोग के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि 2026–27 सत्र की शुरुआत से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि नई व्यवस्था सुचारू रूप से लागू हो सके।
राज्य सरकार का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में तकनीक का उपयोग समय की आवश्यकता है। डिजिटल और AI आधारित प्रणाली से न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था अधिक आधुनिक और उत्तरदायी बनेगी।
इस प्रकार, कर्नाटक में AI आधारित फेस रिकग्निशन उपस्थिति प्रणाली की शुरुआत शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा तकनीकी कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह प्रणाली स्कूल प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रिपोर्ट – अभिनव गुप्ता
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DESK SBN : कर्नाटक में 2026–27 सत्र से स्कूलों में AI आधारित फेस रिकग्निशन उपस्थिति अनिवार्य
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