पैलिएटिव केयरImage Credit source: Getty Images
AIIMS की हाल की स्टडी ने यह चौंकाने वाली बात बताई है कि भारत में गंभीर या लंबी बीमारी वाले लगभग 96% मरीजों को पैलिएटिव केयर नहीं मिल पाती है. स्टडी में यह भी सामने आया कि पैलिएटिव केयर की सुविधा सिर्फ बड़े शहरों और कुछ प्रमुख अस्पतालों तक सीमित है. छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे उपलब्ध कराना मुश्किल है. पैलिएटिव केयर न मिलने का एक बड़ा कारण जानकारी और सुविधाओं का अभाव भी है.
एम्स की स्टडी के अनुसार, मरीजों और उनके परिवारों को दर्द, तनाव और मानसिक पीड़ा से राहत देने वाले इलाज और देखभाल के उपाय अधिकतर जगह उपलब्ध नहीं हैं. यह स्टडी भारत में पैलिएटिव केयर की कमी और सुधार की जरूरत को स्पष्ट करती है. पहले जानते हैं कि पैलिएटिव केयर क्या होती है.
पैलिएटिव केयर एक तरह की राहतकारी देखभाल है जो गंभीर या लंबी बीमारी में मरीजों को आराम देती है. इसका उद्देश्य बीमारी को ठीक करना नहीं बल्कि दर्द, तकलीफ और मानसिक तनाव को कम करना है. यह मरीज की जीवन गुणवत्ता बढ़ाने पर फोकस करती है. पैलिएटिव केयर में दर्द कम करना, सांस लेने में आसानी, पोषण, मानसिक और भावनात्मक सहायता शामिल होती है. इसे डॉक्टर, नर्स और प्रशिक्षित हेल्थ वर्कर्स मिलकर प्रदान करते हैं. यह केवल अंतिम दिनों के लिए नहीं, बल्कि बीमारी के दौरान किसी भी समय दी जा सकती है. दुनिया के कई देशों में यह रोज़मर्रा की स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा है. पैलिएटिव केयर अस्पताल और घर दोनों जगहों पर दी जा सकती है.
देश के 96% मरीजों को क्यों पैलिएटिव केयर नहीं मिल पाती?
पैलिएटिव केयर की सुविधा नहीं मिलने कि मुख्य वजह है कि यह सब जगह समान रूप से नहीं है. बड़े शहरों और बड़े अस्पतालों में ही पैलिएटिव केयर की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैंड स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है. इसके अलावा, पब्लिक हेल्थ सिस्टम में पैलिएटिव केयर को प्राथमिकता नहीं दी जाती.
मरीज और उनके परिवार भी इसे केवल आखिरी दिनों की सेवा समझते हैं, जबकि शुरुआत में ही इसका लाभ मिल सकता है. इसके साथ ही दर्द कम करने वाली दवाओं की उपलब्धता में भी बाधाएं हैं. डॉक्टर और नर्सों को इस क्षेत्र में पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं मिलती. जागरूकता की कमी के कारण मरीज सही समय पर मदद नहीं ले पाते हैं.
क्या है समाधान?
हेल्थ वर्कर्स को पैलिएटिव केयर में विशेष ट्रेनिंग देना.
छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में पैलिएटिव केयर यूनिट स्थापित करना.
दर्द कम करने वाली दवाओं की उपलब्धता और प्रिस्क्रिप्शन पॉलिसी को आसान बनाना.
मरीज और परिवार को पैलिएटिव केयर के महत्व और उपलब्ध विकल्पों के बारे में जागरूक करना.
पैलिएटिव केयर को राष्ट्रीय हेल्थ सिस्टम में बेहतर तरीके से शामिल करना.
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में डॉ. एल. एच. घोटेकर बताते हैं कि पैलिएटिव केयर सिर्फ अंतिम दिनों की सेवा नहीं है. इसे बीमारी की शुरुआत से ही देना चाहिए. ट्रेनिंग, जागरूकता और संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने से मरीजों को बेहतर जीवन गुणवत्ता और आराम मिल सकता है. इससे मरीजों की बीमारी भले ही ठीक न हो, लेकिन अपने अंतिम दिनों में वह बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ रह सकते हैं.

