तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव ला दिया है। दशकों से द्रविड़ पार्टियों—डीएमके और एआईएडीएमके—के बीच सिमटी राजनीति इस बार पूरी तरह बदल गई, जब अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सत्ता की दौड़ में सबसे आगे निकलकर सभी को चौंका दिया।
234 सीटों वाली विधानसभा के लिए हुए इस चुनाव में TVK ने अपने पहले ही प्रयास में जबरदस्त बढ़त बनाई और कई रिपोर्ट्स के अनुसार 100 से अधिक सीटों पर जीत या बढ़त हासिल की।
यह परिणाम इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि यह पार्टी हाल ही में बनी थी और उसने सीधे राज्य की स्थापित राजनीतिक ताकतों को चुनौती दी।
चुनाव की शुरुआत में मुकाबला डीएमके, एआईएडीएमके और TVK के बीच त्रिकोणीय माना जा रहा था। शुरुआती रुझानों में डीएमके आगे दिख रही थी, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, TVK ने तेजी से बढ़त बनाई और दोनों पारंपरिक दलों को पीछे छोड़ दिया।
आखिरकार यह चुनाव “तीसरे विकल्प” की जीत के रूप में उभरा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विजय की लोकप्रियता, खासकर युवाओं और पहली बार वोट देने वालों के बीच, इस जीत का सबसे बड़ा कारण रही। “जेन-ज़ी वेव” यानी युवा मतदाताओं का झुकाव TVK की ओर स्पष्ट रूप से देखा गया, जिसने चुनावी समीकरण बदल दिए।
इसके अलावा पार्टी की डिजिटल रणनीति, सोशल मीडिया कैंपेन और जमीनी स्तर पर मजबूत जुड़ाव ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। TVK के घोषणापत्र में युवाओं के रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों के लिए आय सुरक्षा और प्रशासन में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई थी। इन वादों ने जनता के बीच खासा असर डाला और पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नए विकल्प की छवि बनाई। वहीं, सत्तारूढ़ डीएमके के लिए यह चुनाव बड़ा झटका साबित हुआ। पार्टी न केवल सत्ता से दूर होती दिखी, बल्कि तीसरे स्थान तक खिसक गई। एआईएडीएमके ने भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन वह TVK की लहर के सामने टिक नहीं पाई। इस चुनाव का एक दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि कई सीटों पर बेहद करीबी मुकाबले देखने को मिले। कुछ जगहों पर तो जीत का अंतर बेहद कम रहा, जो मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी और चुनाव की प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है। चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। जहां TVK के समर्थकों में उत्साह का माहौल है, वहीं डीएमके और अन्य दलों के बीच गठबंधन और रणनीति को लेकर मतभेद भी उभरने लगे हैं।
कुल मिलाकर, तमिलनाडु चुनाव 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की जनता अब पारंपरिक राजनीति से आगे बढ़कर नए विकल्पों को मौका देने के लिए तैयार है। विजय की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल सत्ता परिवर्तन किया है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत भी कर दी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।
रिपोर्ट – अभिनव गुप्ता
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Desk SBN : तमिलनाडु में ‘थलपति’ का तूफान, विजय की पार्टी ने बदली सियासत, द्रविड़ दलों का दबदबा टूटा
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