बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण स्टैंडर्ड डिडक्शन पर बड़ा फैसला ले सकती हैं.Image Credit source: ChatGPT
बजट 2026 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. अब देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पास बजट पेश करने के लिए दो हफ्ते से भी कम का समय बचा है. खास बात तो ये है कि इस बार बजट रविवार के दिन पेश होने जा रहा है. ऐसे में देश के शेयर बाजार को भी रविवार के दिन खोलने का फैसला लिया गया है. ऐसा पहली बार होगा जब देश का बजट रविवार को पेश होगा औार साथ ही शेयर बाजार में ओपन होगा. खैर आज बात सिर्फ इतनीभर नहीं है. बल्कि बात तो आज उस टैक्सपेयर्स की होगी, जो कि पिछली बार की तरह से इस बार भी राहत की उम्मीद कर रहे हैं.
पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने कंजंप्शन में इजाफा करने के लिए इनकम टैक्स रेट्स में भारी कटौती की घोषणा के बाद, भारत भर के टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स में और अधिक राहत की उम्मीद कर रहे हैं. बजट 2025 में, सीतारमण ने कई ऐसी घोषणाएं कीं जो टैक्सपेयर्स और सैलरीड लोगों के लिए वरदान साबित हुईं. इनकम टैक्स की दरों दरों में कटौती से लेकर नए टैक्स स्लैब तक, बजट 2025 ने मध्यम वर्ग की कई मांगों को पूरा किया.
वैसे इस बार टैक्सपेयर्स की नजरें स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट पर टिक गई हैं. जानकारों का अनुमान है कि वैसे इस टैक्स में किसी तरह का रद्दोबदल संभव नहीं दिखाई दे रहा है. लेकिन स्टैंडर्ड डिडक्शन के मोर्चे पर सरकार की ओर से विचार किया जा सकता है. स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75 हजार रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए तक किया जा सकता है. जिसकी डिमांड काफी की जा रही है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर पिछले साल देश की वित्त मंत्री ने टैक्स पर कौन सी 5 राहतें दी थीं और इस बार उनसे किस तरह की उम्मीद की जा रही है.
इनकम टैक्स रेट में कटौती
एक अप्रत्याशित घोषणा में, सीतारमण ने 12 लाख रुपए तक की आय को टैक्स फ्री कर दिया था, जिससे मध्यम वर्ग को काफी राहत मिली है. सैलरीड लोगों के लिए, 75,000 रुपए की स्टैंडर्ड डिडक्शन को शामिल करने के बाद प्रभावी सीमा बढ़कर 12.75 लाख रुपए हो गई है. परिणामस्वरूप, 12.75 लाख रुपए तक की आय टैक्स-फ्री हो गई है.
नए टैक्स स्लैब
बजट 2025 में नई टैक्स व्यवस्था के तहत, सीतारमण ने नए स्लैब दरों की भी घोषणा की.
नया इनकम टैक्स बिल
वित्त मंत्री ने नए आयकर विधेयक, 2025 की भी घोषणा की, जिसे बाद में लोकसभा में पारित कर दिया गया. नया आयकर अधिनियम, 2025, जो इस वर्ष 1 अप्रैल से लागू होने वाला है, उसकी भाषा को सरल बनाया गया है, अप्रचलित प्रावधानों को हटाया गया है और सरलीकृत प्रावधानों के लिए सेक्शंस को सुव्यवस्थित किया गया है.
टीडीएस दर में कटौती
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) की कार्यप्रणाली में भी कई बदलाव किए. किराए पर टीडीएस की सीमा 2.4 लाख रुपए से बढ़ाकर 6 लाख रुपए कर दी गई है, जिससे छोटे मकान मालिकों के लिए कंप्लायंस आसान हो गया है. सीनियर सिटीजंस की ब्याज आय पर टीडीएस की सीमा 50,000 रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर दी गई है.
आईटीआर (यू) में राहत
वित्त मंत्री ने घोषणा की कि अपडेटेड आईटीआर (आईटीआर (यू)) पहले के दो वर्षों के बजाय चार वर्षों तक दाखिल किए जा सकते हैं, जिससे टैक्सपेयर्स को अपने इनकम टैक्स रिटर्न को अपडेट करने के लिए अधिक समय मिलेगा.
बजट 2026 में टैक्सपेयर्स की उम्मीदें?
बजट 2025 के बाद, टैक्सपेयर्स अब इनकम टैक्स नियमों में और राहत के लिए बजट 2026 की ओर देख रहे हैं. हालांकि, एक्सपर्ट डायरेक्ट टैक्सेस पर किसी महत्वपूर्ण घोषणा की उम्मीद नहीं कर रहे हैं. ग्रांट थॉर्नटन भारत में टैक्स डिपार्टमेंट की पार्टनर ऋचा साहनी मिंट की रिपोर्ट में कहती हैं कि पिछले साल स्लैब दरों में किए गए बदलावों और टैक्स कलेक्शन पर इसके प्रभाव को देखते हुए, सरकार के लिए इस वर्ष कोई और बदलाव करना संभव नहीं हो सकता है. हालांकि, भविष्य में, यदि कॉस्ट ऑफ लिविंग और महंगाई को ध्यान में रखते हुए न्यू टैक्स रिजीम में स्लैब दरों में वार्षिक रूप से बदलाव किया जाता है, तो इससे टैक्सपेयर्स के एक बड़े वर्ग को लाभ हो सकता है और न्यू टैक्स रिजीम को और अधिक लोकप्रिय बनाने में मदद मिल सकती है.
इकोनॉमिक लॉज प्रैक्टिस के पार्टनर निशांत शाह ने लाइवमिंट से बात करते हुए कहा कि, बजट 2026 में इनकम टैक्स एक्ट, 2025 का सुचारू कार्यान्वयन अपेक्षित है. उन्होंने बताया कि डायरेक्ट टैक्स के संबंध में, एक प्रमुख अपेक्षा विदेशी निवेशकों के लिए व्यापक कर निश्चितता और नए आयकर अधिनियम, 2025 का सुचारू कार्यान्वयन है. इसके अंतर्गत, सरकार कथित तौर पर संप्रभु धन कोषों और अन्य धैर्यवान पूंजी को भारतीय लिस्टेड सिक्योरिटीज में इक्विटी लाभ पर कर से छूट देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिससे वर्तमान सीमित छूटों का विस्तार होगा जो मुख्य रूप से इंफ्रा निवेशों पर केंद्रित हैं. इसका उद्देश्य हाल ही में विदेशी निवेश (एफपीआई) के आउटफ्लो को रोकना और दीर्घकालिक, स्थिर पूंजी को आकर्षित करना है.
स्टैंडर्ड डिडक्शन में बदलाव?
वहीं दूसरी ओर एक्सपर्ट की ओर से उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस बार स्टैंडर्ड डिडक्शन में बदलाव कर आम लोगों को राहत देने का प्रयास कर सकती है. मौजूदा समय में स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट 75 हजार रुपए है. इसका मतलब है कि 12.75 लाख रुपए की सालाना कमाई टैक्स फ्री होती है. अगर स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट एक लाख रुपए होती है तो आम लोगों को 13 लाख रुपए की सालाना कमाई टैक्स फ्री हो जाएगी. आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. वैसे इसकी डिमांड पिछले साल भी की गई थी.

