दिसंबर के महीने में खाने के तेल के इंपोर्ट में 8 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है.Image Credit source: ChatGPT
सर्दियों महीने में जहां लोगों अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए पाम ऑयल की खरीदारी कम कर दी है. वहीं दूसरी ओर सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल की डिमांड में इजाफा देखने को मिल रहा है. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने एक डाटा जारी किया है. इस डाटा में साफ है कि दिसंबर के महीने में पाम ऑयल के इंपोर्ट में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है. जबकि सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल के इंपोर्ट में बढ़ोतरी देखने को मिली है. ये इस बात का संकेत है कि आम लोग अपनी सेहत को लेकर कुछ ज्यादा की सतर्क हो गए हैं. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर एसईए की ओर से किस तरह का डाटा जारी किया है.
वनस्पति तेल इंपोर्ट में इजाफा
उद्योग संगठन एसईए ने मंगलवार को बताया कि सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल की शिपमेंट में भारी वृद्धि के चलते, 2025-26 तेल वर्ष के दूसरे महीने दिसंबर 2025 में भारत का वनस्पति तेल इंपोर्ट पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में आठ फीसदी बढ़कर 13.83 लाख टन हो गया. दुनिया के सबसे बड़े वनस्पति तेल इंपोर्टर देश ने दिसंबर 2024 में खाद्य और गैर-खाद्य तेलों सहित 12.75 लाख टन वनस्पति तेल खरीदा था. हालांकि, चालू वर्ष 2025-26 तेल वर्ष के पहले दो महीनों (नवंबर-अक्टूबर) में कुल वनस्पति तेल इंपोर्ट पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 12 फीसदी घटकर 25.67 लाख टन रह गया.
पाम ऑयल इंपोर्ट में गिरावट
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने एक बयान में कहा कि कुल मिलाकर, पाम ऑयल का इंपोर्ट दिसंबर 2025 में पिछले वर्ष की इसी अवधि के 6.32 लाख टन से 20 फीसदी घटकर 5.07 लाख टन रह गया. एसईए ने एक बयान में कहा कि दिसंबर में आरबीडी पामोलिन का इंपोर्ट शून्य रहा, जबकि क्रूड पाम ऑयल का इंपोर्ट इसी अवधि के 3.26 लाख टन से बढ़कर 5.03 लाख टन हो गया.
सूरजमुखी और सोयाबीन ऑयल के इंपोर्ट में बढ़ोतरी
सूरजमुखी तेल का आयात दिसंबर में 32.19 प्रतिशत बढ़कर 3.49 लाख टन हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2.64 लाख टन था. सोयाबीन तेल का आयात भी उक्त अवधि में 20.23 प्रतिशत बढ़कर 4.20 लाख टन से 5.05 लाख टन हो गया. गैर-खाद्य तेलों का इंपोर्ट दिसंबर 2025 में घटकर 21,000 टन रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 45,764 टन था.
इंडोनेशिया और मलेशिया ताड़ के तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं. रबी या शीतकालीन तिलहन फसलों की बुवाई 2 जनवरी तक 3.04 प्रतिशत बढ़कर 99.30 लाख हेक्टेयर हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह 93.27 लाख हेक्टेयर थी. कुल खाद्य भंडार 1 जनवरी तक 17.50 लाख टन रहा, जो पिछले महीने के 16.21 लाख टन से अधिक है.

