सरकार बजट में कस्टम रेट को लेकर रिफॉर्म कर सकती है.Image Credit source: ChatGPT
Union Budget 2026: बजट का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. आगामी बजट की तैयारियों को लेकर कई बातें सामने आ रही हैं. मामले से परिचित लोगों के अनुसार, आगामी बजट में सीमा शुल्क स्लैबों की संख्या को मौजूदा आठ से घटाकर पांच या छह करने पर सरकार विचार कर रही है. यह बदलाव टैरिफ स्ट्रक्चर को आसान बनाने, मुकदमों को कम करने और इंपोर्ट ड्यूटी को देश की औद्योगिक और व्यापारिक प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि इस प्रोसेस का मुख्य उद्देश्य सीमा शुल्क वर्गीकरण से संबंधित विवादों का समाधान करना, उलटी शुल्क संरचनाओं को ठीक करना और विवेकाधीन छूटों को कम करना है. यह कदम हाल ही में संपन्न हुए और वर्तमान में वार्ता चल रही ट्रेड डील्स के साथ-साथ सरकार द्वारा पेपरलेस और सुगम कस्टम सिस्टम को बढ़ावा देने के प्रयासों के मद्देनजर उठाया जा रहा है.
बड़े रिफॉर्म की तैयारी
केंद्र सरकार पिछले दो वर्षों से स्लैबों को कम करके और छूटों को हटाकर सीमा शुल्क ढांचे में सुधार पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही है. एक सीनियर अधिकारी ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि पिछले बजट में कस्टम स्ट्रक्चर में व्यापक रिफॉर्म गया था. सीमा शुल्क स्लैबों को पांच-छह तक और कम करने की गुंजाइश है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में पिछले तीन-चार महीनों से प्रयास जारी हैं.
इस वर्ष के बजट में इसकी घोषणा होने की उम्मीद है. सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीडी) एक सुचारू और सुसंगत प्रणाली के लिए रिवाइज्ड जीएसटी के साथ सीमा शुल्क को मिलाने का प्रयास करने में जुटी है. उन्होंने बताया कि विभाग व्यवसायों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को हल करने के लिए काम कर रहा है.
फोकस विवादों को कम करना
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से ये भी कहा गया है कि केंद्र सरकार विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) और डॉमेस्टिक टैरिफ एरिया के बीच टैरिफ स्ट्रक्चर को रिडिफाइन करने का प्रयास कर रही है. यह ब्रॉडर एसईजेड रिफॉर्म का हिस्सा है. अधिकारियों ने बताया कि सरकार का पूरा फोकस विवादों को कम करना है, जो बाद में मुकदमेबाजी का एक प्रमुख कारण बनते हैं. वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 में कुल 75,592 सीमा शुल्क मामले लंबित थे, जिन पर वसूली योग्य बकाया राशि 24,016.20 करोड़ रुपए थी.
उन्होंने बताया कि इस संबंध में पिछले तीन-चार महीनों से प्रयास जारी हैं और इस वर्ष के बजट में इसकी घोषणा होने की उम्मीद है. उद्योग जगत ने मुकदमेबाजी को कम करने के लिए उन मामलों में माफी योजना की वकालत की है जहां विवाद जानबूझकर कर चोरी से संबंधित नहीं है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने संकेत दिया था कि सीमा शुल्क का सरलीकरण सरकार के सुधार एजेंडे का अगला प्रमुख बिंदु होगा.

