वोडाफोन आइडिया
Vodafone Idea: साल 2025 की विदाई शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक बेहद सुखद नोट पर हो रही है, खासकर उनके लिए जिन्होंने टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी वोडाफोन आइडिया (VI) पर भरोसा जताया था. साल के आखिरी कारोबारी दिन यानी 31 दिसंबर को वोडाफोन आइडिया के शेयरों में गजब का उत्साह देखने को मिला है. बुधवार की सुबह जैसे ही बाजार खुला, कंपनी के शेयर 3 फीसदी से ज्यादा उछल गए और देखते ही देखते 12.36 रुपये के स्तर पर पहुंच गए. यह आंकड़ा इसलिए भी खास है क्योंकि यह इस शेयर का पिछले 52 हफ्तों का सबसे उच्चतम स्तर (Record High) है.
बाजार में आई इस अचानक तेजी के पीछे सिर्फ साल का आखिरी दिन होना ही वजह नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ी उम्मीद छिपी है. यह उम्मीद जुड़ी है आज होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक से, जिस पर न सिर्फ कंपनी के प्रमोटर्स बल्कि लाखों छोटे निवेशकों की भी निगाहें टिकी हुई हैं.
क्या कैबिनेट मीटिंग में मिलेगी ‘संजीवनी’?
आज दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है. अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स और बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बैठक में वोडाफोन आइडिया को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है. चर्चा यह है कि सरकार टेलीकॉम सेक्टर, और विशेष रूप से वोडाफोन आइडिया को गहरे वित्तीय संकट से उबारने के लिए एक विशेष राहत पैकेज या बेलआउट प्लान पर विचार कर सकती है.
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म CLSA ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में संकेत दिया था कि सरकार कंपनी के ऊपर लदे भारी-भरकम ब्याज और पेनल्टी में छूट देने का मन बना रही है. अगर आज सरकार कंपनी के एजीआर (AGR) बकाये पर लगने वाले ब्याज और पेनल्टी को माफ करने या उसमें ढील देने का फैसला करती है, तो यह डूबती हुई कंपनी के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं होगा. यही वजह है कि निवेशक आज सुबह से ही इस शेयर में जमकर खरीदारी कर रहे हैं.
2 लाख करोड़ का बोझ
वोडाफोन आइडिया की माली हालत किसी से छिपी नहीं है. कंपनी इस वक्त करीब 2 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम सरकारी कर्ज के बोझ तले दबी हुई है. इसमें सबसे बड़ी और डराने वाली हिस्सेदारी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी AGR की है. सुप्रीम कोर्ट में कंपनी द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक कंपनी पर AGR की देनदारी लगभग 83,400 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है.
कंपनी के लिए असली चुनौती मार्च 2026 से शुरू होने वाली है. नियमों के मुताबिक, उस समय से कंपनी को अपना पुराना बकाया चुकाने के लिए अगले छह सालों तक हर साल सरकार को 18,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा. कंपनी की वर्तमान आय को देखते हुए यह एक पहाड़ जैसा लक्ष्य है. यही कारण है कि आज की कैबिनेट बैठक में ब्याज और पेनल्टी पर मिलने वाली संभावित राहत को कंपनी के अस्तित्व के लिए ‘लाइफलाइन’ माना जा रहा है. इससे पहले अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर बकाये के पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) की अनुमति देकर थोड़ी राहत जरूर दी थी, लेकिन बड़ी राहत की दरकार अब भी सरकार से है.
निवेशकों के लिए ‘ब्लॉकबस्टर’ रहा साल 2025
भले ही कंपनी के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो, लेकिन शेयर बाजार में वोडाफोन आइडिया का प्रदर्शन साल 2025 में चौंकाने वाला रहा है. अगर हम बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस साल अब तक इस शेयर ने अपने निवेशकों को 52 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है.
पिछले छह महीनों की बात करें तो यह शेयर 64 फीसदी चढ़ चुका है, जबकि पिछले एक साल की अवधि में इसने निवेशकों की पूंजी में 54 फीसदी का इजाफा किया है. सिर्फ पिछले एक महीने में ही शेयर ने 23 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगाई है. आज 12.32 रुपये के भाव पर पहुंचकर इसने साबित कर दिया है कि बाजार को सरकार से सकारात्मक फैसले की पूरी उम्मीद है.
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