पीएम मोदी 17 और 18 दिसम्बर को ओमान पहुंचेंगे.
चीन के बाद भारत ही वो देश है जहां सबसे ज्यादा अंडों का प्रोडक्शन होता है. पॉल्ट्री इंडिया की रिपोर्ट कहती है, भारत रोजाना 32 करोड़ अंडों का प्रोडक्शन करता है. पूरी दुनिया में जितने भी अंडों का प्रोडक्शन होता है उसमें भारत की हिस्सेदारी 8.40 फीसदी है. भारत में अंडों के प्रोडक्शन में सबसे आगे तमिलनाडु है. यह राज्य 6.5 करोड़ अंडे रोजाना डिलीवर करता है. दूसरे पायदान पर आंध्र प्रदेश और तीसरे पर तेलंगाना है.
भारत अंडों का बड़ा एक्सपोर्टर है. कई खरीदार देश हैं जो इसे आयात करते हैं. यूं तो मिडिल ईस्ट के देश जैसे ओमान, कतर, UAE और बहरीन के साथ मालदीव और अफ्रीकी देश भी भारत से अंडा खरीदते हैं, लेकिन इन सभी देशों में ओमान सबसे आगे है. वो ओमान जहां 17 और 18 दिसम्बर को पीएम मोदी दौरे पर रहेंगे.
भारत जितना भी अंडा एक्सपोर्ट करता है, उसका 40 फीसदी तो सिर्फ ओमान आयात कर लेता है. इस तरह ओमान भारतीय अंडों का सबसे बड़ा मार्केट है. दूसरे पायदान पर श्रीलंका (31%), तीसरे पर मालदीव (15%)और कतर (15%). वहीं, चौथे नम्बर पर संयुक्त अरब अमीरात (15%) है. अब सवाल है कि ओमान भारत से इतने अंडे क्यों खरीदता है.
ओमान भारतीय अंडों का सबसे बड़ा खरीदार क्यों?
भारतीय अंडों का ओमान सबसे बड़ा खरीदार है. इसकी पीछे कई वजह हैं. आइए इसे एक-एक करके समझते हैं.
1- कीमत का असर
पॉल्ट्री इंडिया की रिपोर्ट कहती है, ओमान हो या दूसरे देश, भारतीय अंडों की कीमतें प्रभावित करती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में प्रोडक्शन ज्यादा है इसलिए अंडों के प्रोडक्शन की लागत कम आती है. इसका सकारात्मक असर अंडों के एक्सपोर्ट पर पड़ता है. नतीजा, भारत अपने कुल प्रोडक्शन का 40 फीसदी तक अंडा ओमान को एक्सपोर्ट करता है.

2-बड़े स्तर पर प्रोडक्शन
भारत में बड़े स्तर पर अंडों का प्रोडक्शन होता है. चीन के बाद दूसरे नम्बर पर भारत में अंडों की उपलब्धता देश के लिए अवसर की तरह है. ओमान में अंडों की जरूरत भारत से पूरी हो जाती है. इसलिए यह भी एक वजह है. भारत रोजाना 32 करोड़ अंडों का प्रोडक्शन करता है. यही खूबी व्यापार के आंकड़ों में भी दिखती है.
3- भारतीय अंडों की गुणवत्ता बेहतर
रिपोर्ट कहती है, भारत से आयात करने वाले देशों को भारतीय अंडों की गुणवत्ता काफी प्रभावित करती है. भारत में समय-समय पर इसको लेकर कई कदम उठाए गए हैं. इससे इनकी क्वालिटी पहले से बेहतर हुई है. इसक असर अंडों के एक्सपोर्ट पर भी देखा गया है. कई देशों से भारतीय अंडों की डिमांड आई और उसे पूरा किया गया.

कितनी चुनौतियां?
भारत बेशक अंडों के प्रोडक्शन में इतिहास रच रहा है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं है. ये चुनौतियां भारत को चीन का आंकड़ा पार करने में कहीं न कहीं बाधा बनने का काम कर रही हैं. इसकी कई वजह हैं. कई बार भारतीय अंडों पर लगने वाला प्रतिबंध भी इसकी वजह बनता है. टैरिफ को लेकर होने वाले बदलाव अंडों को एक्सपोर्ट करने की रफ्तार में बाधा पहुंचाते हैं.
कई देशों में खास आकार और निश्चित वजन वाले अंडों की मांग की जाती है, जिन पर भारतीय अंडे नहीं खरे उतर पाते. यह भी एक बड़ी चुनौती है. अंडों को एक्सपोर्ट करने के लिए जो सर्टिफर्टिकेशन की जरूरत होती है उसे हासिल करने में भी देरी भी एक चुनौती है. इन्हें एक्सपोर्ट करने के लिए वेटरनरी क्लियरेंस, रेसिड्यूफ्री सर्टिफिकेशन की जरूरत होती है. इसमें भी कई बार देरी हो जाती है.
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