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अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की अध्यक्ष टोमोको अकाने ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी पाबंदियों का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने 193 सदस्य देशों से अदालत के बचाव में एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि न्यायाधिकरण को दबाने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। अकाने ने अमेरिका द्वारा न्यायाधीशों और अभियोजकों पर लगाए गए प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय न्याय के लिए खतरा बताया।
संयुक्त राष्ट्र, तीन नवंबर (एपी) अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) की अध्यक्ष ने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह न्यायाधिकरण पर दंड लगाकर अंतरराष्ट्रीय न्याय में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है और कहा कि उसका यह प्रयास सफल नहीं होगा।
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण सोमवार को संयुक्त राष्ट्र को डिजिटल माध्यम से संबोधित कर रहीं जापान की न्यायाधीश टोमोको अकाने ने न केवल आईसीसी का हिस्सा रहे 125 देशों से बल्कि संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों से अपील की कि वे “अदालत के बचाव में, व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से, ठोस कदम उठाएं”।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने आईसीसी अधिकारियों पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इसके अलावा, पिछले महीने उन्होंने पूरी अदालत को ही निशाना बनाया। यह कदम उस अभियान का हिस्सा है, जिसका मकसद अमेरिका और इजराइल समेत उसके सहयोगियों के खिलाफ हो रही जांच को लेकर इस न्यायाधिकरण को खत्म करना है।
अकाने ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा को डिजिटल माध्यम से उनका संबोधन अमेरिका के उन ‘‘असाधारण’’ और ‘‘अभूतपूर्व’’ कदमों का परिणाम है, जिनसे न्यायाधीशों, अभियोजकों और एक संस्था के रूप में खुद आईसीसी को खतरा पैदा हो गया है।
उन्होंने नौ अक्टूबर को ट्रंप प्रशासन द्वारा अदालत पर व्यापक नए प्रतिबंधों की घोषणा किए जाने के समय का भी उल्लेख किया। उसी दिन दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ और आईसीसी की पूर्व न्यायाधीश नवी पिल्ले को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।
आईसीसी अध्यक्ष ने कहा, “दोनों के बीच का विरोधाभास इससे ज्यादा स्पष्ट नहीं हो सकता। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय न्याय के महत्व को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है, तो दूसरी तरफ उस संस्था को ही दबाने की कोशिश की जा रही है जो इस न्याय का प्रतीक है।”
अकाने की टिप्पणियों पर अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।
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