प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च 2015 को PRAGATI लॉन्च किया था. इसका मकसद केंद्र सरकार के मंत्रालयों के बीच समन्वय और केंद्र व राज्य सरकारों में प्रोजेक्ट को लेकर समन्वय स्थापित करना था. दो दिन पहले पीएम मोदी ने इसकी (PRAGATI) 50वीं बैठक की थी. इसे लेकर कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने बताया किप्रगति के जरिए 85 लाख करोड रुपये से ज्यादा के 3 हजार 300 से ज्यादा प्रोजेक्ट की समीक्षा की गई है. उसमें तेजी लाई गई है.
उन्होंने बताया कि 61 सरकारी योजनाओं और 36 क्षेत्रों में शिकायतों के मामले की समीक्षा करके तेजी लाई गई है.प्रगति के जरिए 7 हजार 735 मामले आए, जिसमें 7 हजार 156 मामले सुलझाए गए हैं. 382 गंभीर और जटिल प्रोजेक्ट के मामले खुद पीएम मोदी ने समीक्षा करके सुलझाए हैं.
प्रोजेक्ट में लागत और समय बढ़ना एक समस्या थी
कैबिनेट सचिव सोमनाथन ने बताया कि प्रोजेक्ट में लागत और समय बढ़ना देश में एक समस्या थी. वजह थी केंद्रीय मंत्रालयों में समन्वय ना होना. केंद्र-राज्य सरकार और स्थायीय प्रशासन में समन्वय ना होना. पीएम मोदी प्रगति की बैठक को केंद्र सरकार के सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ करते है. इसमें योजनाओं और प्रोजेक्ट की समीक्षा पीएम के जरिए की जाती है.
वहीं, प्रगति की 50वीं बैठक में पीएम मोदी ने 5 राज्यों में फैली 5 महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा की थी. इनकी लागत 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है. पीएम ने कहा, पिछले दशक में PRAGATI के नेतृत्व वाले इकोसिस्टम ने 85 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद की है.
स्पीड और डिलीवरी के लिए प्रगति जरूरी
उन्होंने कहा कि सुधार की गति को बनाए रखने और डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए प्रगति जरूरी है. राष्ट्रीय हित में लंबे समय से अटकी परियोजनाएं पूरी की गई हैं.प्रगति सहकारी संघवाद का उदाहरण है. साइलो-आधारित कामकाज को तोड़ता है. उन्होंने राज्यों को प्रगति जैसे तंत्र को संस्थागत बनाने के लिए प्रोत्साहित किया.
साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम श्री स्कूलों को राज्य सरकारों के अन्य स्कूलों के लिए बेंचमार्क बनाने के प्रयास किए जाने चाहिए. इसके साथ ही पीएम मोदी ने प्रगति के अगले चरण के लिए गुरु मंत्र दिया. पीएम ने कहा कि सरल बनाने के लिए सुधार, परिणाम देने के लिए प्रदर्शन, प्रभाव डालने के लिए बदलाव जरूरी है.

