आश्रम में थी महिला
राजस्थान के भरतपुर में शनिवार को एक आश्रम में इमोशनल माहौल रहा, जहां एक मां-बेटे का 10 साल बाद मिलन हुआ. महिला साल करीब 10 साल पहले बिना बताए घर से चली गई थी, जिसके बाद उन्हें आश्रम भरतपुर के अपना आश्रम में ले जाया गया और तभी से वह यहीं रह रही थीं. जब उनके परिवार वालों की तलाश की गई और उनसे संपर्क किया गया तो मां के जिंदा होने का पता चलते ही बेटा असम से मां के पास पहुंच गया.
असम के जोरहट के रहने वाली रूपाबेन उर्फ जमुना मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की वजह से साल 2015 में अचानक से किसी को कुछ बिना बताए घर से निकल कहीं चली गई थीं. परिवार ने उन्हें हर जगह ढूंढ़ने की कोशिश की, लेकिन वह कहीं नहीं मिलीं. जब उनका कुछ पता नहीं चल पाया तो परिवार ने मायूस होकर सभी उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन अब 10 साल बाद वह राजस्थान के भरतपुर में मिली तो परिवार की खुशी के ठिकाने नहीं रहे.
साल 2018 में भरतपुर के आश्रम पहुंचीं
साल 2018 में रूपाबेन को सूरत से भरतपुर के अपना घर आश्रम में सेवा और इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. जब उनका लगातार इलाज चला और जब उनकी हालत में सुधार हुआ तो उनके परिवार से संपर्क किया गया. रूपाबेन ने ठीक होने के बाद अपने घर का पता बताया, जिसके बाद आश्रम की टीम ने असम के जोरहाट के गांव राजबाड़ी में स्थित उनके घर का पता लगाया.
वीडियो कॉल पर मां की पहचान की
इसके बाद आश्रम की टीम ने रूपाबेन की उनके बेटे जयंत नायक और उनके देवर सूरज तांती से वीडियो कॉल पर बात कराई. दोनों ने महिला की पहचान कर ली. बेटे को जैसे ही पता कि उनकी मां जिंदा हैं. वह तुरंत अपने चाचा के साथ मां को लेने के लिए भरतपुर अपना घर आश्रम में पहुंच गए. जैसे ही दोनों ने एक-दूसरे को देखा. दोनों खुशी से झूम उठे और गले लगकर खूब रोए. दोनों को देखकर आसपास के लोगों की भी आंखें भर आईं.
मां के गम में हो थी पिता की मौत
बेटे ने बताया कि जब उसकी मां घर छोड़कर गई थी. तब वह महज 12 साल के थे. जब उसकी मां घर छोड़कर चली गई तो उनके गम में पिता की भी मौत हो गई थी. जयंत के एक-भाई बहन और भी हैं. मां के जाने के बाद उनका परिवार टूट गया था, लेकिन अब फिर से उनकी जिंदगी में बहार लौट आई है. अब जयंत की शादी भी होने वाली है और इससे पहले उनकी मां भी लौट आई हैं तो उनकी खुशी बढ़ गई है. आश्रम ने सभी फॉर्मेलिटी पूरी करने के बाद जयंत की मां को उनके परिवार को सुपुर्द कर दिया.

