रक्षा मंत्रालय की अमेरिकी कंपनी से हुई डील
भारतीय सेना के लिए अमेरिकी कंपनी सिग सॉयर से असॉल्ट राइफलें खरीदी जाएंगी. रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को 73,000 राइफलों की खरीद के लिए 659 करोड़ की डील पर हस्ताक्षर किए हैं. अब सेना के जवानों को रात के अंधेरे में भी दुश्मनों पर सटीक निशाना लगाने में मदद मिलेगी. यह सौदा M/s MKU Ltd (लीड सदस्य) और M/s Medbit Technologies Pvt Ltd के कंसोर्टियम के साथ किया गया. खास बात यह है कि यह खरीद ‘बाय (इंडियन-आईडीडीएम)’ श्रेणी के तहत है, जिसमें 51% से अधिक स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) शामिल है. यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है.
सिग-716 असॉल्ट राइफलों की खरीद से सैनिकों को लंबी दूरी की मुठभेड़ों में आसानी होगी. ये राइफलें तारों की रोशनी में भी 500 मीटर तक की प्रभावी रेंज में लक्ष्यों को भेदने में सक्षम हैं. ये साइट्स, सेना के पास मौजूदा ‘पैसिव नाइट साइट्स’ (PNS) से कहीं ज्यादा बेहतर हैं. 51% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, यह खरीद रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है. इस पहल से कलपुर्जों के निर्माण और कच्चे माल की आपूर्ति से जुड़े छोटे उद्यमों को भी लाभ होगा.
2019 में भी खरीदी थीं 72,400 सिग-716 असॉल्ट राइफलें
फरवरी 2019 में, भारतीय सेना ने अमेरिकी कंपनी सिग सॉयर से 600 मीटर तक की मारक क्षमता वाली 72,400 सिग-716 असॉल्ट राइफलें खरीदीं. 647 करोड़ के फास्ट-ट्रैक प्रोक्योरमेंट (FTP) सौदे के तहत खरीदी गईं 7.62×51 मिमी कैलिबर की ये असॉल्ट राइफलें दिसंबर 2019 में वितरित की गईं. ये राइफलें सबसे पहले जम्मू और कश्मीर के उधमपुर स्थित उत्तरी कमान को प्राप्त हुईं.
आतंकवाद विरोधी अभियानों में होंगी प्रयोग
भारतीय सेना के मुताबिक इन रायफलों को आतंकवाद विरोधी अभियानों के तहत उपयोग किया जाएगा. सेना ने बताया कि पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर तैनात पैदल सेना बटालियनों को अधिक संख्या में सिग सॉयर राइफलें प्राप्त हुई हैं, जबकि अन्य बटालियनों को 50% से कम प्राप्त हुई हैं. भारतीय सशस्त्र बलों में हथियारों की कमी को दूर करने के लिए खरीदी गई 72,400 राइफलों में से 66,400 थल सेना को, 4,000 भारतीय वायु सेना को और 2,000 नौसेना को दी गईं.
वर्तमान में भारत के पास हैं 20 लाख हथियार
भारतीय सशस्त्र बलों के पास वर्तमान में लगभग 20 लाख हथियार हैं. भारतीय सेना विभिन्न प्रकार की असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल करती है, जिनमें इंसास (भारतीय लघु शस्त्र प्रणाली), एके-47, सिग सॉयर 716 और बुर्ज गन शामिल हैं. लगभग 10 लाख इंसास राइफलें छोटे हथियारों के भंडार का एक बड़ा हिस्सा हैं.
MSMEs को मिलेगा फायदा
इस पहल से न केवल सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि यह उन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को भी लाभ पहुंचाएगी जो इसके कल-पुर्जे बनाने और कच्चा माल सप्लाई करने में शामिल हैं. यह स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में एक शानदार कदम है.
