दिल्ली में हुए विस्फोट में शामिल कार कई हाथों में बेचे जाने के बाद भी उसका मालिकाना हक पूर्व मालिक के नाम पर ही होने से पुराने वाहनों की खरीद फरोख्त की एक गंभीर खामी फिर से उजागर हो गई है.लाल किले के पास हुए ब्लास्ट में शामिल आतंकी डॉक्टर उमर मोहम्मद जिस I20 कार का इस्तेमाल कर रहा था वो गाड़ी उसके नाम पर नहीं थी. ऐसे में अब सेकंड हैंड गाड़ी खरीदने पर RC ट्रांसफर को जरूरी बनाए जाने की मांग की जा रही है.
इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए व्यापारियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड इन इंडस्ट्री (CTI) चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि दिल्ली और देश में एक तिहाई से ज्यादा सेकंड हैंड वाहन मूल खरीददार के नाम पर ही चल रहे हैं. उन्होंने बताया कि जो लोग उन वाहनों को चला रहे हैं कागजों में वो उन वाहनों के मालिक ही नहीं हैं. आमतौर पर ना तो विक्रेता वाहन को बेचने के समय पंजीकरण कराने की अहमियत समझता है और ना ही खरीददार वाहन का अपने नाम पर पंजीकरण कराने में रुचि दिखाता है.
CTI केंद्रीय परिवहन मंत्री को लिखा पत्र
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस मुद्दे पर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा है. जिसमें उन्होंने मांग की है कि सेकंड हैंड वाहन खरीद पर RC ट्रांसफर पॉलिसी को अनिवार्य किया जाए और साथ ही RC ट्रांसफर प्रक्रिया को भी आसान बनाया जाए जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोग पुराने वाहनों को बेचते समय अपने वाहन का RC नए खरीददार के नाम पर ट्रांसफर करा सकें.
ट्रांसफर की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग
बृजेश गोयल ने बताया कि अभी RC ट्रांसफर की प्रक्रिया बहुत ही जटिल है जिससे कि ज्यादातर लोग अपना वाहन बेचते समय RC ट्रांसफर कराने से कतराते हैं. परिवहन विभाग या यातायात पुलिस इस बात की जांच करती है कि वाहन चालक के पास इंश्योरेंस, प्रदूषण या वाहन के कागज हैं या नहीं . उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी गलती का एहसास तब होता है जब वह वाहन किसी अपराध में उपयोग होता है और वह उस मामले में फंस चुके होते हैं इसलिए लोगों को अपना वाहन बेचते समय अपना नाम भी अवश्य ट्रांसफर करवाना चाहिए .
गोयल ने कहा कि अगर नया मालिक कोई यातायात उल्लंघन करता है या किसी दुर्घटना में शामिल होता है तो विक्रेता को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है क्योंकि RC में अभी भी उनका नाम दर्ज है. ऐसे में कई बार वो लोग भी फंस जाते हैं जिनके नाम पर वाहन है.

