सऊदी अरब ने शेख सालेह बिन फ़ौज़ान को नया ग्रैंड मुफ्ती घोषित किया है.
शेख सालेह बिन फ़ौज़ान को सऊदी अरब का नया ग्रैंड मुफ्ती बनाया गया है. वे सऊदी अरब के सर्वोच्च धार्मिक पद पर नियुक्त हो गए हैं. इसी साल सितंबर में सऊदी के पूर्व ग्रैंड मुफ्ती शेख़ अब्दुल अज़ीज़ अल अशेख़ (Abdulaziz Al Sheikh) के निधन के बाद, अक्टूबर 2025 में शेख़ सालेह बिन फौज़ान अल फ़ौज़ान (Saleh al Fawzan) को शाही फरमान से नया ग्रैंड मुफ्ती नियुक्त किया गया.
यह नियुक्ति राजा के आदेश से होती है और अक्सर क्राउन प्रिंस की सिफारिश पर होती है. आइए इसी बहाने जानते हैं कि क्या होता है ग्रैंड मुफ्ती का काम? कैसे होता है चुनाव? कब और कैसे शुरू हुई परंपरा?
कौन होता है ग्रैंड मुफ्ती, क्या है इनका काम?
ग्रैंड मुफ्ती सऊदी अरब में सर्वोच्च धार्मिक अधिकारी होता है. वह शरिया कानून और धार्मिक-फैसलों (फतवा) का अधिकारी, धार्मिक परिषदों का प्रमुख और सरकारी स्तर पर धार्मिक नीतियों का मुख्य सलाहकार होता है. इसके पास कई जिम्मेदारियां होती हैं, जैसे-
- फतवा जारी करना: ग्रैंड मुफ्ती का सबसे प्रमुख कर्तव्य धार्मिक कानूनी प्रश्नों पर फतवा (विधि-विचार) जारी करना है. यह फतवे व्यक्तिगत और सामाजिक मुद्दों से लेकर राज्य नीतियों तक पर असर डालते हैं. इस पद के ताकतवर होने के अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सऊदी न्यायालय प्रणाली अक्सर मुफ्ती के विचारों से प्रभावित होती है.
- धार्मिक संस्थाओं का नेतृत्व: ग्रैंड मुफ्ती सामान्यतः काउंसिल ऑफ सीनियर स्कॉलर्स का अध्यक्ष और परमानेंट कमेटी फॉर इस्लामिक रिसर्च एंड इश्युइंग फतवा (स्थायी समिति) के प्रमुख होते हैं. वह जनरल प्रेसिडेंसी फॉर स्कॉलरली रिसर्च और Ifta जैसी संस्थाओं का प्रमुख भी होता है, जिनके माध्यम से फतवों का औपचारिक प्रकाशन और रिकॉर्ड होता है.
- राज्य को धार्मिक सलाह देना: कोर्ट, शासकीय संस्थाओं और नीति-निर्धारकों को धार्मिक दृष्टि से मार्गदर्शन देना; कभी-कभी हज और तीर्थस्थान (Mecca/Medina) से जुड़े निर्णयों में भी इनकी भूमिका रहती है.
- धार्मिक शिक्षा और नियुक्तियों में प्रभाव: न्यायिक और धार्मिक शिक्षा संस्थाओं में पाठ्यक्रम, न्यायाधिकरणों के लिए धार्मिक मानदंडों और प्राचार्यों के चयन पर भी इस पद पर आसीन व्यक्ति का प्रभाव होता है.
- सार्वजनिक वक्तव्य और समाज व्यवहार: सामाजिक मुद्दों पर आधिकारिक धार्मिक रुख निर्धारित करना भी इसी पद पर आसीन व्यक्ति का काम होता है. जैसे खेल मनोरंजन, सांस्कृतिक नीतियाँ, दीक्षांत शृंखला आदि.
सऊदी अरब में ग्रैंड मुफ्ती की नियुक्ति राजा के शाही फरमान से होती है.
नियुक्ति, चुनाव या शाही नियुक्ति?
सऊदी में ग्रैंड मुफ्ती का चुनाव नहीं होता. यह पद शाही नियुक्ति द्वारा भरा जाता है. इस पद पर नियुक्ति राजा (King) द्वारा शाही फरमान (Royal Decree) से होती है. अक्सर क्राउन प्रिंस की सिफारिश निर्णायक होती है. हालिया उदाहरण में शेख़ सालेह अल फ़ौज़ान की नियुक्ति राजा सलमान ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की संस्तुति पर की है. इस पद का नियमबद्ध कार्यकाल नहीं होता.
परंपरागत रूप से यह जीवनकालिक (Life Tenure) माना जाता रहा है यानी व्यक्ति तब तक रह सकता है जब तक राजा न बदले या पद त्याग न दे. कई मुफ्ती जीवनपर्यंत रहे हैं. ऐतिहासिक रूप से यह पद अक्सर अल अशेख़ (Al ash Sheikh) वंश के सदस्यों को दिया गया है. यही वंश 18वीं सदी में मुहम्मद इब्न अब्दुल वह़्हाब से जुड़ा है और सऊदी धार्मिक प्रतिष्ठान में उसकी खास स्थिति रही है.
ग्रैंड मुफ्ती की परंपरा कब और कैसे शुरू हुई?
ग्रैंड मुफ्ती का सरकारी रूप में कार्यालय साल 1953 में राजा अब्दुल अज़ीज़ (Ibn Saud) द्वारा स्थापित किया गया और पहले ग्रैंड मुफ्ती मुहम्मद इब्न इब्राहिम अल अशेख़ (Muhammad ibn Ibrahim Al ash Sheikh) बने. यह कदम आधुनिक सऊदी राज्य की व्यवस्था में धार्मिक नेतृत्व को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुए.
साल 1969 में राजा फैसल ने इस कार्यालय को सामान्य न्याय मंत्रालय में समेकित कर इसे अस्थायी रूप से समाप्त कर दिया. साल 1993 में यह पद फिर बहाल किया गया और अब्दुल अज़ीज़ बिन अब्दुल्लाह बिन बाज़ (Ibn Baz) को नियुक्त किया गया. इसका अर्थ है कि पद की संरचना और महत्व समय-समय पर शासकीय जरुरतों के अनुसार बदली है. सऊदी की धार्मिक परंपरा (वहाबी/सालाफी) और आधुनिक राज्य व्यवस्था के बीच इस पद ने समय के साथ सामंजस्य बनाया. इसका रुख कभी कठोर रूढ़िवादी रहा तो कभी राज्य नियोजित संतुलन की नीति भी देखने को मिली.
कौन हैं शेख़ सालेह बिन फ़ौज़ान?
शेख़ सालेह अल फ़ौज़ान सऊदी के प्रतिष्ठित और परंपरावादी मतवादों में गिने जाने वाले विद्वान हैं. वे लंबे समय से Council of Senior Scholars और Permanent Committee में रहे हैं. वे रेडियो टेलीविजन पर भी सक्रिय रहे हैं. उनकी नियुक्ति पर आधिकारिक खबरों में बताया गया कि यह शाही फरमान था और नियुक्ति क्राउन प्रिंस की अनुशंसा पर हुई. उनकी विचारधारा पर पूर्व में विवाद और आलोचना भी होती रही है.
सऊदी अरब में ग्रैंड मुफ्ती का पद धार्मिक औपचारिकता और राज्य शक्ति के बीच एक पुल का काम करता है. यह धार्मिक कर्तव्यों (फतवा, शिक्षण, धार्मिक प्राधिकरण) का केंद्र है और साथ ही राज्य की नीतियों को धार्मिक वैधता देने में निर्णायक भूमिका निभाता है. सऊदी में इस पद की नियुक्ति शाही प्रक्रिया के जरिये होती है. यह पारंपरिक वंश संबंधों और राजनीतिक-धार्मिक संतुलन दोनों का परिणाम होती है. शेख़ सालेह अल फ़ौज़ान की 2025 की नियुक्ति उसी लंबी परंपरा का नवीनतम उदाहरण है, जिसमें राज्य और धार्मिक प्रतिष्ठान के रिश्ते की वर्तमान रूपरेखा झलकती है.
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