श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द
जम्मू के प्रतिष्ठित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस यानी SMVDIME की मान्यता नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) ने रद्द कर दी है. इसके पीछे एनएमसी ने खराब इंफ्रस्ट्रक्चर और मूलभूत सुविधाओं की कमी को बताया है. एनएमसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मेडिकल कॉलेज में औचक निरीक्षण के दौरान न्यूनतम मानकों का भी गंभीर उल्लंघन देखा गया है. जिस आधार पर यह कार्रवाई की गई है. चलिए एजुकेशन सिस्टम की नजर से इस पूरे मामले को समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर कैसे किसी संस्थान को एनएमसी के जरिए मेडिकल कॉलेज की मान्यता मिलती है और किन आधारों पर उस मान्यता को रद्द किया जा सकता है?
श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज लंबे समय से विवादों में चल रहा था.जिसमें समुदाय विशेष के बच्चों को ज्यादा एडमिशन देने वाली बात भी सामने आई थी. इस पर हिंदू संगठनों ने विरोध भी जताया था. हालांकि अधिकारिक तौर पर ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है. एनएमसी की ओर से मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने 2025-26 के लिए एमबीबीएस कोर्स की मंजूरी रद्द कर दी है. इसके लिए एनएमसी की ओर से लेटर ऑफ परमिशन दिया जाता है जो कि वापस ले लिया गया है.
किन आधारों पर मिलती है मान्यता
एनएमसी किसी संस्थान को मान्यता देने से पहले एक जांच टीम भेजती है, जो कि संस्थान के अंदर इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी, क्लिनिकल सुविधाएं, रिसर्च सुविधाएं समेत कई मानकों की जांच करती है. इनके अलावा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त संसाधन और नियमों का पालन भी सुनिश्चित किया जाता है.
बुनियादी ढांचा और संसाधन– अच्छे और पर्याप्त सिटिंग वाले लेक्चर थिएटर, प्रैक्टिकल लैब, लाइब्रेरी और रीडिंग रूम जरूरी हैं. इनके अलावा पर्याप्त बेड क्षमता, आईसीयू सुविधाएं, ऑपरेशन थिएटर, आधुनिक उपकरण भी जरूरी हैं.
फैकल्टी– योग्य और शिक्षित फैकल्टी जिसमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, ट्यूटर/रेजिडेंट डॉक्टर आदि होने जरूरी हैं. इनके अलावा क्लिनिकल और रोगी देखभाल के लिए शिक्षित स्टाफ भी जरूरी है. इसके अलावा मरीजों की संख्या, ओपीडी विजिट और बेड ऑक्यूपेंसी दर की भी जांच की जाती है. इसके अलावा आधुनिक मेडिकल सेवाओं की मशीनरी और उसे इस्तेमाल करने वाले स्टाफ भी जरूरी हैं.
एकेडमिक्स और रिसर्च सेंटर– समय-समय पर रिसर्च, रिसर्च आउटपुट जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित होना चाहिए और पेटेंट भी होना चाहिए. एनएमसी के निर्धारित सिलेबस की पढ़ाई जरूरी है.
नियमों का सख्ती से पालन- एनएमसी के चिकित्सा संस्थानों की स्थापना, मूल्यांकन और रेटिंग विनिमय 2023 जैसे नियमों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है. फैकल्टी और छात्रों का अनुपात तय मानकों से कम नहीं होना चाहिए.
कैसे निरीक्षण करती है NMC
नेशनल मेडिकल काउंसिल किसी भी मेडिकल कॉलेज की समय-समय पर अलग-अलग मानकों की जांच करती रहती है. इसी आधार पर उन्हें लेटर ऑफ परमिशन दिया जाता है या फिर कमियां पाए जाने पर वापस ले लिया जाता है. मेडिकल कॉलेजों की जांच के लिए एनएमसी के अधिकारी औचक निरीक्षण करते हैं और सभी नियमों के मुताबिक जांच की जाती है. शिक्षकों की संख्या, प्रोपर इंफ्रस्ट्रक्चर, रिसर्च सेंटर की स्थिति, हॉस्पिटल स्टाफ और मरीजों की स्थिति आदि की जांच की जाती है. वहीं दूसरा रास्ता है ऑनलाइन पोर्टल से जांच. COAP पोर्टल पर कॉलेजों की स्थिति से संबंधित डेटा अपलोड किया जाता है. यहां पर छात्र भी मेडिकल कॉलेज की सारी जानकारी देख सकते हैं.
एनएमसी का दायित्व ये है कि देश में मेडिकल स्टूडेंट्स को क्वालिटी एजुकेशन मिले ताकि उनका भविष्य बेहतर बने और आगे जाकर वह सफल डॉक्टर बन सकें.
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