बिहार में पहले चरण की वोटिंगव में टूटे सारे रिकॉर्ड
बिहार में हुए पहले चरण के मतदान ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. बिहार के चुनावी इतिहास में यह अब तक की सर्वाधिक वोटिंग पर्सेंटेज है. इससे पहले 2000 में 62.57 फीसदी वोटिंग हुई थी. ऐसे में जानिए 1951 से 2020 तक का वोटिंग परसेंटेज…
पहले चरण में 64.66 फीसदी वोटिंग
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों 64.66 फीसदी मतदान हुआ. पहले चरण में कुल 1314 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे थे. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी जैसे दिग्गज नेताओं और 16 मंत्रियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई. दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को होगी और 14 नवंबर को नतीजे आएंगे.
1951 से 2020 तक का वोटिंग परसेंटेज
| साल | प्रतिशत |
| 1951-52 | 42.6 |
| 1957 | 43.24 |
| 1962 | 44.47 |
| 1967 | 51.51 |
| 1969 | 52.79 |
| 1972 | 52.79 |
| 1977 | 50.51 |
| 1980 | 57.28 |
| 1985 | 56.27 |
| 1990 | 62.04 |
| 1995 | 61.79 |
| 2000 | 62.57 |
| 2005-फरवरी | 46.5 |
| 2005- अक्टूबर | 45.85 |
| 2010 | 52.73 |
| 2015 | 56.91 |
| 2020 | 57.29 |
दांव पर इन दिग्गजों की किस्मत
- राघोपुर से तेजस्वी यादव
- तारापुर से सम्राट चौधरी
- लखीसराय से विजय कुमार सिन्हा
- सीवान से मंगल पांडे
- बांकीपुर से नितिन नवीन
- जाले से जीवेश मिश्रा
- दरभंगा शहरी से संजय सरावगी
- कुढ़नी से केदार प्रसाद गुप्ता
- साहेबगंज से राजू कुमार
- अमनौर से कृष्ण कुमार मंटू
- बिहारशरीफ से सुनील कुमार
- बछवाड़ा से सुरेंद्र मेहता
- सरायरंजन से विजय कुमार चौधरी
- नालंदा से श्रवण कुमार
- बहादुरपुर से मदन सहनी
- कल्याणपुर महेश्वर हजारी
- सोनबरसा से रत्नेश सदा

