दिल्ली विधानसभा में सिख गुरुओं को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले ने तूल पकड़ लिया है. विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता और विपक्ष की नेता आतिशी को सिख गुरुओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में नोटिस जारी किया है, जिस पर उन्होंने सोमवार (19 जनवरी 2026) को अपना लिखित जवाब दिया.
विशेषाधिकार समिति के नोटिस पर जवाब देते हुए AAP नेता आतिशी ने कहा कि सिख गुरुओं का सम्मान उनके लिए आस्था और जीवन का मूल्य है. उन्होंने कहा कि मैंने ज़िंदगी में कभी गुरुओं का निरादर नहीं किया. आतिशी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया. इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि 6 जनवरी की दिल्ली विधान सभा की ओरिजिनल अनएडिटेड वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई जाए.
‘मैंने नहीं की अपमानजनक टिप्पणी’
आतिशी ने अपने जवाब में कहा ‘मैं सर्वप्रथम स्पष्ट और सत्यनिष्ठा पूर्वक यह कहना चाहती हूं कि मैंने कभी भी सिख गुरुओं के विरुद्ध कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है, न तो 6 जनवरी 2026 को सदन में और न ही कभी और. मैं इस आरोप का पूर्णतः खंडन करती हूं.
आतिशी ने परिवार का किया जिक्र
उन्होंने कहा ‘मैं एक ऐसे परिवार से आती हूं जहां सिख गुरुओं के प्रति श्रद्धा राजनीतिक रुख का विषय नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों और गहरी व्यक्तिगत आस्था का हिस्सा है. एक ऐसा परिवार जहां पीढ़ियों से सबसे बड़ा बेटा सिख धर्म अपनाकर समुदाय की सेवा करता आया है. सिख गुरु, विशेष रूप से गुरु तेग बहादुर जी, त्याग, साहस और मानवीय गरिमा की रक्षा के सर्वोच्च आदर्शों का प्रतिनिधित्व करते हैं. मैं नैतिक रूप से उनके प्रति अनादर पूर्ण माने जाने वाले किसी भी शब्द का उच्चारण करने में असमर्थ हूं’.
AAP नेता ने बताई पूरी बात
AAP नेता ने आगे कहा ‘6 जनवरी 2026 को सदन में प्रदूषण और शासन के मुद्दे पर तीखी राजनीतिक बहस हुई, जब माननीय मंत्री रविंदर इंद्रराज सिंह सदन के समक्ष माननीय उपराज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश कर रहे थे. इस दौरान चर्चा से बचने के आरोप में सत्ताधारी दल के सदस्यों के खिलाफ नारे लगाए गए. आम आदमी पार्टी के विधायकों ने माननीय अध्यक्ष से उपराज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा से पहले प्रदूषण पर चर्चा कराने का अनुरोध किया. इस दौरान सिख गुरुओं का किसी भी प्रकार से उल्लेख नहीं किया गया’.
नेता विपक्ष ने कहा ‘मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि माननीय अध्यक्ष महोदय की ओर से मुझे ‘सभा में उपस्थित होकर सही स्थिति स्पष्ट करने’ का कोई पत्र या अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है, जैसा कि आपके नोटिस में कहा गया है.
अनएडिटेड वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग
इसके अतिरिक्त, मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन करना चाहती हूं कि उत्तर में दिए गए नोटिस में अस्पष्ट शब्दों का प्रयोग किया गया है, जैसे कि: आपकी टिप्पणियों के कारण “सदन में अफरा-तफरी मच गई” और “कार्यवाही बाधित हुई”, जबकि स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है. उन्होंने अनुरोध किया उन्हें 6 जनवरी की दिल्ली विधानसभा की ओरिजिनल अनएडिटेड वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई जाए. साथ ही उनके विरुद्ध दर्ज शिकायत की कॉपी और अध्यक्ष द्वारा उन्हें बैठक में उपस्थित होने और उक्त आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए भेजे गए लिखित पत्र की प्रति उपलब्ध कराई जाए. उन्होंने कहा कि उपरोक्त सामग्री प्राप्त होने पर वो समिति द्वारा अपेक्षित किसी भी स्पष्टीकरण को प्रस्तुत करने में सक्षम होंगी.
विशेषाधिकार समिति ने जारी किया था नोटिस
दरअसल दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी को कथित विशेषाधिकार उल्लंघन के संबंध में नोटिस जारी किया था और उनसे 19 जनवरी तक लिखित जवाब मांगा था. सत्ताधारी बीजेपी ने आतिशी पर गुरु तेग बहादुर के खिलाफ ‘असंवेदनशील शब्दों’ का प्रयोग करने का आरोप लगाया और माफी मांगने की मांग की. दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि चर्चा के दौरान आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और सदन की गरिमा को ठेस पहुंची.
‘रिकॉर्डिंग में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं’
इधर दिल्ली विधानसभा ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग मामले को लेकर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बीते शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि एफएसएल रिपोर्ट मिल गई है. इससे पता चलता है कि सदन की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग में किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है. शब्दशः कार्यवाही और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग पूरी तरह एक-दूसरे से मेल खाते हैं. चल रही जांच और राज्य एजेंसियों के संभावित दुरुपयोग से जुड़े गंभीर सवालों के मद्देनजर इस मामले की जांच CBI से कराई जा सकती है. इस संबंध में निर्देश जारी किए जाएंगे.

