रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 4–5 दिसंबर 2025 को भारत का दो दिवसीय राजकीय दौरा पूरा किया। यह दौरा Indian Ministry of External Affairs (MEA) की पुष्टि के अनुसार हुआ। उनका यह दौरा इस लिहाज से महत्वपूर्ण था कि यह उनकी पहली भारत यात्रा है जब से Russia–Ukraine War (2022 में शुरू) हुआ। पिछली बार पुतिन दिसंबर 2021 में भारत आ चुके थे। पुतिन 4 दिसंबर की शाम दिल्ली पहुँचे। उनका स्वागत भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं पालम एयरपोर्ट पर जाकर किया — जो आम अधिकारियों के लिए अनसुना सम्मान है। 5 दिसंबर को उन्हें औपचारिक स्वागत व गार्ड-ऑफ-ऑनर मिला।उसी दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में राज्य भोज (State Dinner) आयोजित किया। इस भोज में भारत-रूस की दोस्ती और कूटनीतिक रिश्तों को गौरवान्वित रूप में दिखाया गया।दौरे के दौरान, भारत और रूस ने अपने “विशेष और रणनीतिक साझेदारी” को और मजबूत करने की दिशा में कई अहम थीम्स पर चर्चा की। रक्षा एवं सैन्य साझा सौदे: नई वायु रक्षा प्रणालियाँ, जैसे कि अतिरिक्त S-400 Triumf मिसाइल सिस्टम, और संभवतः Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट्स की खरीद-संभावना। ऊर्जा और ईंधन आपूर्ति: रूस ने भारत को भरोसा दिया कि रूस की ओर से तेल (क्रूड ऑयल) की आपूर्ति “बिना रुकावट” जारी रहेगी — भले ही पश्चिमी देशों द्वारा दबाव हो।परमाणु ऊर्जा सहयोग: दक्षिण भारत के तामिलनाडु में स्थित Nuclear Power Plant प्रोजेक्ट सहित, रूस और भारत ने नए – छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और अन्य शांतिपूर्ण परमाणु परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया।व्यापार और आर्थिक साझेदारी: दोनों देशों ने घोषणा की कि वे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य बना रहे हैं। वर्तमान में इनका सालाना व्यापार (FY 2024–25) लगभग 69 बिलियन डॉलर रहा।अन्य क्षेत्रों में सहयोग: कृषि, उर्वरक, औषधि, उच्च-तकनीक, possibly मैन्युफैक्चरिंग आदि में साझा प्रयासों पर सहमति बनी।दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते और घोषणाएं हुईं:रक्षा सह-निर्माण एवं को-डेवलपमेंट — भारत में मिलकर हथियार, रक्षा प्रणाली, और विमान बनाने का रास्ता खोला — ताकि भारत की रक्षा-निर्भरता कम हो सके। ऊर्जा क्षेत्र में — तेल आपूर्ति, परमाणु ऊर्जा साझेदारी, और “Make in India” के तहत रूसी निवेश की संभावना। व्यापार एवं आर्थिक सहयोग — 2030 तक 100 अरब डॉलर तक व्यापार बढ़ाने का रोडमैप तय हुआ।सांस्कृतिक एवं मीडिया सहयोग — रूस की समाचार एजेंसी/चैनल RT का भारत में bureau शुरू करने की योजना पर सहमति बनी। इस दौरे का महत्व सिर्फ भारत–रूस संबंधों तक सीमित नहीं रहा — बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीति में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति (strategic autonomy) और बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था (multipolar world) में उसके हिस्से को फिर से रेखांकित करता है। इस दौरान, रूस ने विशेष रूप से कहा कि वह पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत को ऊर्जा आपूर्ति बंद नहीं करेगा।
भारत ने अपनी विदेश नीति के “स्वतंत्र” रुख को दोहराया — कि वह न तो रूस से पूरी तरह कटेगा, और न ही केवल पश्चिम की ओर जाएगा — बल्कि अपने हितों को 5 दिसंबर की शाम पुतिन ने भारत से विदा ली। दो दिन के इस दौरे में कई अहम समझौते हुए, वार्ता हुई, और भारत–रूस संबंधों को आगे बढ़ाने की नींव रखी गई।इस दौरे को देखते हुए कहा जा सकता है कि — चाहे रक्षा हो, ऊर्जा हो, व्यापार हो या वैश्विक राजनीति — भारत और रूस ने अपनी साझेदारी को नई दिशा दी है।
रिपोर्ट – अभिनव गुप्ता
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भारत–रूस रिश्तों को नई दिशा: दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली आए पुतिन, कई बड़े समझौतों पर बनी सहमति
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