श्रीलंका इन दिनों अपने इतिहास की एक बड़ी प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। चक्रवात दितवा ने 28 नवंबर को जब देश के उत्तरी हिस्सों में दस्तक दी, तो उसने अपने पीछे भारी तबाही छोड़ दी। तेज हवाओं, लगातार हो रही बारिश और समुद्र में उठ रही ऊँची लहरों ने कई इलाकों को जलमग्न कर दिया। इस भीषण आपदा की वजह से अब तक 123 लोगों की मृत्यु हो चुकी है जबकि लगभग 130 लोग अभी भी लापता हैं। बाढ़ और भूस्खलन ने शहरों, गांवों, सड़कों और खेतों को व्यापक नुकसान पहुँचाया है। हजारों लोग अपने घरों से बेघर हो गए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।ऐसी कठिन घड़ी में भारत ने अपने पड़ोसी और मित्र देश श्रीलंका की सहायता के लिए तुरंत कदम उठाया। मानवीय संवेदनाएँ और पड़ोसी देशों की सहायता करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारत ने मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान (HADR) के तहत ऑपरेशन सागर बंधु नाम का मिशन शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य श्रीलंका को आपदा से उबरने में तेज़ और प्रभावी मदद पहुँचाना है।
भारत ने अपनी वायुसेना और नौसेना, दोनों को इस राहत कार्य में लगाया है। सबसे पहले भारतीय नौसेना के जहाज़ आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि को राहत सामग्री लेकर श्रीलंका भेजा गया। ये जहाज़ श्रीलंका की राजधानी कोलंबो पहुँचे और वहाँ उन्होंने 4.5 टन सूखा राशन और 2 टन ताज़ा भोजन श्रीलंका के अधिकारियों को सौंपा। इस राहत सामग्री में चावल, दाल, आटा, बिस्कुट, स्टेपल खाद्य पदार्थ और जरूरत की अन्य चीजें शामिल थीं, जिनसे बाढ़ प्रभावित परिवारों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा किया जा सके।
इसके साथ ही भारत ने अपने राहत अभियान को और तेज़ करते हुए भारतीय वायुसेना को भी इसमें शामिल किया। वायुसेना का एक बड़ा विमान लगभग 12 टन मानवतावादी सहायता सामग्री लेकर कोलंबो पहुँचा। इस सामग्री में जरूरतमंद परिवारों के लिए टेंट, तिरपाल, कंबल, स्वच्छता किट, दवाइयाँ और तुरंत खाने के लिए तैयार भोजन (Ready to Eat Meals) शामिल थे। यह सामान उन लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जिन्हें अपने घर छोड़कर अस्थायी शिविरों में रहना पड़ रहा है।श्रीलंका में कई इलाके पूरी तरह बाढ़ में डूब गए हैं। घरों के अंदर पानी घुस गया है, कई परिवारों की बुनियादी जरूरतें पूरी तरह खत्म हो गई हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई ये मदद न केवल उपयोगी है, बल्कि समय पर पहुँचने के कारण कई लोगों की जिंदगी बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। टेंट और तिरपाल जैसी चीजें उन हजारों लोगों को अस्थायी छत उपलब्ध कराएंगी जिनके घर बाढ़ में बह गए हैं। वहीं भोजन और स्वच्छता सामग्री प्रभावित परिवारों को कुछ दिनों तक सुरक्षित और स्वस्थ रहने में मदद करेगी।भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ‘X’ (पहले ट्विटर) पर इस राहत अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि ऑपरेशन सागर बंधु शुरू कर दिया गया है। उन्होंने लिखा,“ऑपरेशन सागर बंधु शुरू। आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि ने कोलंबो में राहत सामग्री सौंपी। आगे की कार्रवाई जारी है।”उनके इस संदेश से साफ होता है कि भारत सिर्फ एक बार की मदद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि श्रीलंका की स्थिति सामान्य होने तक सहयोग जारी रखेगा।यह पहली बार नहीं है जब भारत ने किसी पड़ोसी देश को प्राकृतिक आपदा के समय तुरंत सहायता भेजी हो। इससे पहले भी नेपाल में आए भूकंप, मालदीव में पानी संकट, मेडागास्कर में चक्रवात, और मोज़ाम्बिक में तूफान जैसी कई आपदाओं के दौरान भारत ने राहत सामग्री और बचाव दल भेजकर मदद की है। भारत का यह रुख बताता है कि वह पड़ोसी देशों की संकट की घड़ी में ‘पहला प्रतिक्रिया देने वाला’ देश बनने के लिए हमेशा तैयार रहता है। यही वजह है कि भारत का यह कदम श्रीलंका में भी काफी सराहा जा रहा है।
चक्रवात दितवा ने श्रीलंका में सिर्फ घरों और सड़कों को ही नहीं, बल्कि संचार व्यवस्था और बिजली आपूर्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर बिजली के खंभे गिर गए हैं, मोबाइल नेटवर्क ठप हो गया है और पीने के पानी की समस्या बढ़ गई है। ऐसे समय में खाने-पीने की चीजें और जरूरी उपकरण लेकर पहुँचना लोगों को राहत दे रहा है।
भारत और श्रीलंका के संबंध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद गहरे हैं। दोनों देशों के बीच कई दशकों से विश्वास और सहयोग की मजबूत परंपरा रही है। भारत का यह कदम सिर्फ मानवीय सहायता नहीं है, बल्कि मित्रता और सद्भाव का उदाहरण भी है।ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारत आगे भी दवाइयाँ, पानी शुद्धिकरण उपकरण, जनरेटर और अन्य जरूरी सामान भेजने पर विचार कर रहा है। भारतीय नौसेना के और भी जहाज़ तत्पर हैं, और जरूरत पड़ने पर वे जल्द ही अतिरिक्त राहत सामग्री लेकर श्रीलंका के लिए रवाना होंगे।श्रीलंका की सरकार ने भारत द्वारा भेजी गई राहत को सराहते हुए कहा है कि यह मदद ऐसे समय में मिली है जब देश के कई हिस्सों में हालात बेहद गंभीर हैं। भारत की यह त्वरित सहायता राहत कार्यों को गति देने में मदद करेगी और प्रभावित परिवारों को जल्द सामान्य जीवन में लौटने में सहायक होगी।समग्र रूप से देखा जाए तो भारत का यह मानवीय कदम न केवल श्रीलंका की आपदा से निपटने में मदद करेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को भी और मजबूत बनाएगा। प्राकृतिक आपदाएँ कभी नहीं बतातीं कि वे कब आएंगी, लेकिन संकट के समय पर की गई मदद और संवेदनशीलता को हमेशा याद रखा जाता है।
रिपोर्ट : अभिनव गुप्ता
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भारत ने चक्रवात दितवा से जूझ रहे श्रीलंका की मदद के लिए शुरू किया ‘ऑपरेशन सागर बंधु’
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